भरतलाल की सगाई


भरतलाल शर्मा मेरा सरकारी भृत्य है. उसकी अस्थाई नौकरी लगते ही गांव-देस में उसकी इज्जत बढ गई. पांच हजार की पगार की स्लिप उसने गर्व से सबको दिखाई. सब परिजन-दुर्जन कर्जा मांगने में जुट गये. उसके भाई जो उससे बेगार कराते थे और उसकी सारी मजदूरी हड़प जाते थे, अब उससे हक से/बेहक से पैसा मांगने लगे. बिना मां-बाप का भरतलाल इतना अटेंशन पाकर कुप्पा होगया. लिहाजा बचत का बड़ा हिस्सा धर्मादे में जाने लगा. जो कर्जा उसने दिया उसे कोई चुकाने का नाम ही नही लेता.

सरकारी नौकरी – जो देर सबेर पक्की होने वाली हो, लड़के को जवान होती लड़की के मां-बाप का आदर्श बना देती है. सो पड़ोस की लड़की से बात भी पक्की हो गई. सगाई के समय तक भरतलाल गांव के लोगों को पैसे बांटते-बांटते तंग हो गया था. सगाई में खर्चे की बात आई तो सब किनारा कर गये. उल्टे, भरतलाल को इस बात पर ब्लैकमेल भी करने लगे कि वे सगाई में न आ सकेंगे.

सगाई का पूरा इन्तजाम-खर्च भरतलाल ने किया. परिजनों ने उसे सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करने की कस कर कीमत वसूली. सारे आये. ठसक कर आवभगत कराई. गांव मे शहर के स्टाइल का ३०० लोगों का भोज भी भरतलाल के खर्चे पर डकारा. सब की मदद करने वाला भरतलाल १५-२० हजार रुपये के नीचे उतर गया. लगभग इतना ही पैसा उसने लोगों को मुसीबत के समय बिना ब्याज के कर्ज दिया था, जो लोगों ने उसका काम पड़ने पर नहीं लौटाया. भरतलाल अब यदा कदा अवसाद से ग्रस्त रहता है, कुछ बुदबुदाता रहता है.

भरतलाल भोन्दू नहीं है. भरतलाल संवेदनशील जीव है. उसकी संवेदना गांव का हरामीपन मारे दे रहा है. गांव का हरामीपन और भरतलाल की संवेदना किस सीमा तक जाते हैं, यह देखने की बात होगी.


[अपडेट: दिसम्बर 2011 –  भरतलाल के पैसे तो नहीं चुकाये उसके रिश्तेदार मित्रों ने। अंतत: उसकी शादी भी हो गयी। उसमें सारा खर्चा उसी का हुआ। अब भरतलाल मेरा भृत्य नहीं है। उसकी नौकरी परमानेण्ट हो चुकी है और वह सूबेदारगंज में मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में पियून है।

एक बच्चा हो गया है उसका और अब एक साल का होने जा रहा है।

जैसा भरतलाल बताता है, उसका पैसे का प्रबन्धन अब बेहतर है।]

Advertisements

Author: Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://halchal.blog/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyan1955

One thought on “भरतलाल की सगाई”

  1. ह्ह्म्म्म्म्म ….यह सही है… कि अधिक सम्वेदनशीलता भी अच्छी नहीं, किन्तु बिना इसके भी आदमी और जानवर में भेद नहीं किया जा सकता।रिपुदमन पचौरी

    Like

आपकी टिप्पणी के लिये खांचा:

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s