धन पर श्री अरविन्द



भारतीय मनीषियों व दार्शनिकों ने धन पर बहुत सकारात्मक नहीं लिखा है. माया महा ठगिनी है यही अवधारणा प्रधान रही है. धन को साधना में अवरोध माना गया है. स्वामी विवेकानन्द ने तो अपने गुरु के साथ उनके बिस्तर के नीचे पैसे रख कर उनके रिस्पांस की परीक्षा ली थी.

धन के दैवीय होने की बात तो श्री अरविन्द ने ही की है.

श्री अरविन्द की छोटी सी, पर अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तक है माता (The Mother). इसके चौथे अध्याय में धन पर चर्चा है. मैं इसका पहला पैरा आपके सामने रखता हूं:

धन एक विश्वजनीन शक्ति का स्थूल चिन्ह है. यह शक्ति भूलोक में प्रकट हो कर प्राण और जड़ के क्षेत्रों में काम करती है. बाह्य जीवन की परिपूर्णता के लिये इसका होना अनिवार्य है. इसके मूल और इसके वास्तविक कर्म को देखते हुये, यह शक्ति भगवान की है. परंतु भगवान की अन्यान्य शक्तियोंके समान यह शक्ति भी यहां दूसरों को सौप दी गयी है और इस कारण अध:प्रकृति के अज्ञानान्धकार में इसका अहंकार के काम में अपहरण हो सकता है अथवा असुरोंके प्रभाव में आकर विकृत होकर यह उनके काम आ सकती है. मानव अहंकार और असुर जिन तीन शक्तियों से सबसे अधिक आकर्षित होते हैं और जो प्राय: अनाधिकारियों के हाथ में पड़ जाती हैं तथा ये अनाधिकारी जिनका दुरुपयोग ही करते हैं, उन्ही आधिपत्य, धन और काम इन तीन शक्तियों में से एक शक्ति है धन. धन के चाहने या रखने वाले धन के स्वामी तो क्या होते हैं, अधिकतर धन के दास ही होते हैं…..

श्री अरविन्द की पुस्तक का यह अध्याय धन के विषय मे‍ हमारी कई रूढ़ियां दूर करता है. धन के प्रति आसक्ति और अरुचि दोनों ही अहंकारी या आसुरी स्वभाव हैं. हम दरिद्रता में हों तो वेदना न हो और भोग विलास में हों तो असंयम के दास न हों – जब यह सही एटीट्यूड रख कर धन का अर्जन ईश्वरीय कार्य के लिये करेंगे तभी श्रेयस्कर होगा.

आपने न पढ़ी हो तो कृपया यह पुस्तक पढें.

मैं बैटरी वाली साइकल लूंगा!


टाटा की लखटकिया कार आयेगी तो मोटर साइकल वाले अपग्रेड हो कर सड़कें पाट देंगे. सडकें जब गलियों में तब्दील हो जायेंगी (जैसे कि अब नहीं हैं क्या?) तब पतली गली से निकलने को साइकल ही उपयुक्त होगी. अत: मेरा लेटेस्ट चिंतन है कि मैं बैटरी वाली साइकल लूंगा.

इस बारे में मैने फाइनांस मिनिस्टरी (पढ़ें मेरी पत्नी) से चर्चा कर अप्रूवल भी ले लिया है. वहां से अप्रूवल बड़ी मुश्किल से मिलता है. किसी जमाने में उनका नजरिया था कि मापेड पर चलने की बजाय गधे पर सवारी करना ज्यादा बेहतर विकल्प है. पर अब सवेरे की सैर के समय भीड और चांद की सतह वाली सडकें देख कर उन्होंने अपना मत बदल लिया है.

बैटरी वाली साइकल के मार्केट में कई प्लेयर कूदने वाले हैं. एवोन साइकल्स, के ई वी इण्डिया, कैसर आटो मोटो, एटलस साइकल्स, ऐस मोटर्स, इलेक्ट्रोथर्म, हीरो साइकल्स आदि अगले साल भर में डेढ लाख बैटरी वाली साइकलें बाजार में उतार देंगे.

दस पैसे में एक किलोमीटर चलना, कम प्रदूषण, कम स्पीड से कम दुर्घटना का जोखिम, रजिस्ट्रेशन से मुक्ति, पतली गली से मेन्यूवर कर निकल लेने की सुविधा बड़े फायदे हैं इस साइकल के. बस दो बातों की समस्या है. एक तो इन साइकलों का पे-लोड केवल 75 किलो है. अत: अपना वजन कम करना होगा. दूसरे, पत्नी की यह चिंता कि वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड का सरकारी अफसर साइकल पर चलता कैसा लगेगा कब सिर उठा कर फुंकारने लगेगी और अप्रूवल विड्रा हो जायेगी कहा नहीं जा सकता. कई बार अपनी सहूलियत, सोच और निश्चय पर लोग क्या कहेंगे भारी पड़ जाता है.

बैटरी वाली साइकलें यातायात में गम्भीर योगदान देंगी. इंटरनेशनल हेरल्ड ट्रिब्यून का यह पन्ना देखें.