मैं सारथी हूं



तुम्हें याद न होगा पार्थ
कि तुम पार्थ हो
मैं जन्म-जन्मांतरों में
तुम्हारे रथ की डोर
अपने हाथ में रख
दिलाता रहा हूं तुम्हें विजय
तुम्हारे विषाद-योग ग्रस्त होने पर
ललकारता रहा हूं
कहता रहा हूं तुम्हें दुर्बल-नपुंसक
बनाता रहा हूं तुम्हें निमित्त
देता रहा हूं आश्वासन
तुम्हें समीप होने का
तुम्हें प्रिय होने का
तुम्हें अंतत: विजयी होने का
अनेक प्रकार से
अनेक रूपों में
अनेक युगों में
तुम्हारी उंगली पकड़े रखी है
लाता रहा हूं मैं तुम्हारा रथ
अच्छाई और बुराई की सेनाओं के बीच
भीष्म के शंखनाद का उत्तर देने को
उत्प्रेरित करता रहा हूं मैं
बार-बार बनाता रहा हूं तुम्हें स्थितप्रज्ञ
और यह होता रहेगा
आने वाले जन्म-जन्मांतरों में भी
तुम्हें याद न होगा पार्थ
हां, यह कि तुम पार्थ हो
हां, यह भी, कि मैं सारथी हूं.