आप तो बिल्कुल खतम आदमी हैं!


शिव कुमार मिश्र ने मुझे एस.एम.एस. किया है कि कल रात एक गायन प्रतियोगिता में बप्पी लाहिड़ी ने एक प्रतियोगी से कहा – यू आर ए फ़िनिश्ड सिन्गर. और फ़िर हिन्दी में जोड़ा – तुम बहुत जल्दी फ़ेमस बनेगा. इसका हिन्दी अनुवाद करें तो कुछ ऐसा होगा – तुम तो बिल्कुल खतम गायक हो और बहुत जल्दी प्रसिद्ध हो जाओगे!

उक्त खतम के दो अर्थ हैं :

  • खतम का हिन्दी अर्थ होता है – गया-बीता, बेकार, अब-कोई-उम्मीद-नही आदि.
  • बप्पी लाहिड़ी ने उसका प्रयोग किया है – तराशा हुआ, परिपूर्ण, परिपक्व आदि के रूप में.

अर्थात एक ही शब्द पर दो अलग-अलग छोर के अर्थ. इस प्रकार का घालमेल रोचक स्थितियां पैदा कर सकता है. अब निम्न उदाहरणों में खतम का दूसरे अर्थ में प्रयोग किया गया है. पर आप पहले अर्थ में उसका आनन्द ले सकते हैं:

  • हिन्दी वाले खतम हैं.
  • अरुण अरोड़ा खतम पन्गेबाज हैं.
  • फ़ुरसतिया एकदम खतम ब्लागर हैं.
  • समीर लाल की टिप्पणियां खतमतम होती हैं.
  • अभय तिवारी ने अछूतों पर एक खतम शोध किया है.
  • इन्फ़ोसिस के नारायणमूर्ति एक खतम व्यक्तित्व हैं.
  • आप बिल्कुल खतम आदमी हैं.

सही में, क्या खतम पोस्ट है!

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एथेनॉल चलायेगा कार – आपकी जीत होगी या हार!


मुझे यह आशा है कि देर सबेर ब्राजील की तर्ज पर भारत में एथेनॉल का प्रयोग डीजल/पेट्रोल ब्लैण्डिंग में 20-25% तक होने लगेगा और उससे न केवल पेट्रोलियम पर निर्भरता कम होगी, वरन उससे पूर्वांचल/बिहार की अर्थव्यवस्था भी चमकेगी. अभी चार दिन पहले बिजनेस स्टेण्डर्ड में लीड स्टोरी थी कि कई बड़े स्टॉक मार्केट के बुल्स – राकेश झुनझुनवला सहित, बड़े पैमाने पर देश-विदेश में बायो-ईन्धन के स्टॉक्स में खरीद कर रहे हैं.

और परसों बिजनेस स्टेण्डर्ड में ही, उसके उलट है कि एथेनॉल का प्रयोग आपकी कार के लिये मारक हो सकता है – गलती से भी थोड़ा पानी मिल गया बायो-फ्यूल में तो आपकी कार नष्ट हो सकती है. अर्थात उस प्रकार की बात कि एक दिन किसी स्केंडेनेवियायी देश की रिपोर्ट को बैनर हेडलाइन के साथ छपा पायें कि चाकलेट खाकर आप 110 साल जी सकते हैं. और दूसरे दिन आप ढ़िमाकी लैब के डायरेक्टर के माध्यम से शोध से लाभांवित हों कि चॉकलेट स्वास्थ्य के लिये जहर हैं.

(एथेनॉल का ऑर्गेनिक सूत्र)

और देखें – यह आस्ट्रेलिया की रिपोर्ट – एथेनॉल मिक्सिंग 20 लाख आस्ट्रेलियायी कारों का बाजा बजाने वाली है. या फिर स्टॉनफोर्ड न्यूज का 18 अप्रेल का यह पन्ना जो कहता है कि एथेनॉल के वाहन मानव स्वास्थ्य पर काफी दुष्प्रभाव ड़ालते हैं.

लोग इस सोच से भी दुबले हो रहे हैं कि बायो फ्यूल की खेती से अन्न उत्पादन कम होगा और भुखमरी बढ़ेगी.

उक्त लिंक वाले लेख मैने पढ़े हैं और मेरे अपने निष्कर्ष निम्न हैं –

  1. एथेनॉल के बतौर बॉयो फ्यूल प्रयोग के रोका नहीं जा सकता. यह उत्तरोत्तर बढ़ेगा. खनिज तेल की कीमतें – डिमाण्ड-सप्लाई-लोभ के चलते देर सबेर स्काईरॉकेट करेंगी. और फिर कोई चारा नहीं होगा एथेनॉल ब्लैण्डिंग के विकल्प पर अमल करने के आलावा.
  2. भारत में जट्रोफा/कुरंज/रतनजोत/गन्ना का प्रयोग एथेनॉल बनाने में उत्तरोत्तर बढ़ेगा. वाहनों के इंजन बेहतर बनेंगे.
  3. एथेनॉल रिफाइनरी छोटे पैमाने पर अनेक स्थानों पर होंगी और उससे ईन्धन की यातायात जरूरतें भी कम होंगी.
  4. एथेनॉल ब्लैंडिंग 99.9% शुद्ध हो; बिना पानी मिलाये; यह सुनिश्चित करने के कठोर उपाय किये जायेंगे.
  5. स्वास्थ्य पर एथेनॉल के दुष्प्रभाव पर अभी अंतिम शब्द कहे नहीं गये हैं. इसी प्रकार वाहनों के ऊपर होने वाले दुष्प्रभाव उस तरह के लोगों की भविष्यवाणिंया हैं जो टिटिहरी ब्राण्ड सोच प्रसारित करते हैं.
  6. अर्थव्यवस्था या बाजार तय करेंगे कि भविष्य क्या होगा. पर्यावरणवादी अपनी आदत के अनुसार आपस में लड़ते रहेंगे.
  7. पर्यावरणवादी ही कहते हैं कि एथेनॉल वायु प्रदूषण से लड़ने का बहुत अच्छा उपाय है. इससे ग्लोबल वार्मिंग कम होती है, कार्बन मोनोक्साइड और कार्बन डाइआक्साइड के उत्सर्जन में 30% कमी आती है. इससे ज्वलनशील तत्व/जहरीले पदार्थ/ठोस पार्टीकल के उत्सर्जन में भी क्रमश: 12,30 व 25% की कमी आती है. (आप “ethanol fuel blending plus points” आदि के गूगल सर्च कर लें – ढ़ेरों लिंक मिलेंगे!)

मित्रों, मैं अपने बचपन से देखता आ रहा हूं. एक लॉबी एक कोण से लिखती है. दूसरी लॉबी दूसरे कोण से. मौका परस्त एक लॉबी कभी दूसरी लॉबी में तब्दील भी हो जाती है! अंतत: जो होना होता है वह होता है. एथेनॉल का विरोध करने वाले भविष्य में बायो-फ्यूल चलित कार में जायेंगे बायो-फ्यूल के खिलाफ प्रदर्शन करने को!