अनाधिकृत निर्माण बचाने के उपाय


अनाधिकृत निर्माण बचाने के लिये मंदिर और राज कर रही पार्टी का ध्वज बहुत काम के हैं। आप में इस प्रकार के काम करने की ढ़िठाई पहली शर्त है। आप जरा नीचे चित्र मेयह इमारत देखें। दो मंजिला और बरसाती की निर्माण की अनुमति के स्थान पर यहां चार मंजिलें और बरसाती खड़ी हैं।

इस पोस्ट का यह जोहो राइटर मुझे विण्डोज लाइव राइटर से ज्यादा काम का लग रहा है।

निर्माण तो हो गया, पर वह स्थायी रहे – इसके लिये कगूरे पर एक मंदिर बना दिया गया है। जिससे कोई अगर अवैध निर्माण तोड़े तो पहले मन्दिर तोड़ना पड़े और धार्मिक मामला बन जाये। कोई सरकार इस पचड़े में पड़ना नहीं चाहेगी। दूसरे उसपर राज कर रहे दल का झण्डा भी फहरा दिया जाये – जिससे निर्माण पोलिटिकली करेक्ट दिखाई दे।
मैं यहां जिस इमारत का चित्र दे रहा हूं वह तो चिर्कुट स्तर का अनाधिकृत निर्माण है। पर यही हथकण्डे और यही मानसिकता हाई-फाई स्तर के अवैध निर्माण और जमीन दाब अभियानों में काम में लाये जाते हैं। बस आपमें अव्वल दर्जे की ढ़िठाई के साथ साथ खुला खेल खेलने के लिये पारंगत होना, लोकल स्तर की अच्छी पोलिटिकल नेटवर्किंग और (ऑफकोर्स) दृढ़ इच्छा शक्ति होनी चाहिये।

अवैध मंजिलों के साथ मकान निर्माण
अवैध निर्माण को बचाने के लिये लाल वृत्त में मंदिर और नीले वृत्त में राज कर रहे दल का झण्डा

इस पोस्ट को लिखने में प्रयुक्त यह जोहो राइटर मुझे विण्डोज लाइव राइटर से ज्यादा काम का लग रहा है। एक तो ब्लॉगस्पॉट पर पोस्टिंग स्वीकार न करने का झंझट नहीं आ रहा जो विण्डोज लाइवराइटर से बार बार हो रहा था। दूसरे; कम्यूटरों पर गूगल गीयर उपलब्ध होने से पोस्ट एक से दूसरे कम्प्यूटर पर ऑफलाइन आसानी से एडिट कर सकता हूं। और अगर गूगल गीयर न भी हो तो भी इसका ऑनलाइन एडीटर, blogger.com के एडीटर से कहीं ज्यादा फीचर्स वाला है। अभी तो मैं इसमे उपलब्ध फीचर्स के प्रयोग (experiment) कर रहा हूं। ऊपर आप देख सकते हैं – टेबल, चित्र और पुलकोट के प्रयोग।


मेरे “जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले…” के सस्वर पाठ को सुन कर भरतलाल का मेरी मां से सन्दर्भ पुष्टिकरण संवाद – “ई उहई अहइ न दादी? जब सीरियलवा में रमणवा कैलास उठावत रहा। सिवजी अंगुठवा से चाप देहेन। रमणवा जब ओमे चपाइग त मारि लट्ट-पट्ट-कपट-झपट्ट गावइ लाग?” (दादी यह वही है न? जब टीवी सीरियल में रावण कैलाश पर्वत उठा रहा था। शिवजी ने उसे रोकने के लिये अपने अंगूठे से दबा दिया। जब रावण उसमें दब गया तब खूब लट्ट-पट्ट-कपट-झपट्ट गाने लगा?) उल्लेखनीय है कि यह रावण विरचित शिव ताण्डव स्तोत्र है। किसी सीरियल में भरतलाल ने रावण को यह स्तोत्र गाते देखा होगा कभी। वह संदर्भ बताने का यह विशुद्ध भरतलाली अन्दाज था। 


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Author: Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://halchal.blog/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt

19 thoughts on “अनाधिकृत निर्माण बचाने के उपाय”

  1. हम साँझा प्रयास में विश्वास करते है, पंगेबाज जमीन पर घेरा डालेंगे, हम मन्दीर बनायेंगे, उडन तशतरी भवन निर्माण करेगी :)यह तो थी मजाक की बात. वैसे कानून का भय नहीं और भूजबल का बोलबाला इस के लिए जिम्मेदार है.

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  2. ये झंडे का फंडा भौत अच्छा है लेकिन हमारे मप्र में लोग इससे दो कदम और आगे है, हमारे अख़बार का ही फोटोग्राफर एक फोटो लेकर आया था जिसमें एक पुरी इमारत ही पार्टी विशेष के रंग में रंगी थी.

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  3. भईया आज कल आप और शिव कुछ jayada ही nidar नहीं हो गए हैं ? वो महाराष्ट्र की एक पार्टी से panga ले रहे है और आप avaidhya निर्माण करने वालों की पोल khol रहे हैं…इश्वर आप दोनों को बुरे लोगों की buri nazron से bachaaye …neeraj

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  4. आपने जो तरकीब/तिकडम बताई है इसके द्वारा आज हिन्दुस्तान में कुछ भी किया जा सकता है.

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