सुलेम सराय का इक्का, बैलगाड़ी और डीजल-पेट्रोल के दाम



Ekka1
इक्का १
Ekka2
इक्का २
Tempo
टेम्पो पर पीछे लटकता कण्डक्टर
|| चलते वाहन में से मोबाइल द्वारा ली गयी तस्वीरें ||

इस मध्यम आकार के शहर इलाहाबाद में कम्यूटर (शहर में आने जाने वाले) के लिये मुख्य साधन है विक्रम टेम्पो। हड़हड़-खड़खड़ करते टेम्पो, जिनके पीछे लिखा रहता है – “स्क्रबर@ युक्त ~ प्रदूषण मुक्त”। पर वे सबसे ज्यादा अव्यवस्था फैलाते और सबसे ज्यादा प्रदूषण जनक हैं। फिर भी सबसे लोकप्रिय वाहन हैं। सड़क, चौराहे को चोक करने वाले मानव शरीरों से पैक वाहन।

इसके विपरीत मुझे अपने दफ्तर के पास झलवा से सुलेम सराय के बीच चलते इक्के दीखते हैं। पुरानी डिजाइन के, मरियल से सामान्य कद काठी के घोड़ों से युक्त। सड़क की दशा-दुर्दशा को देखते हुये उनकी और मेरे वाहन की चाल में विशेष अन्तर नहीं होता। वाहन खुली सड़क की अपेक्षतया ज्यादा तेल खाता है। इक्के इस ढ़ाई किलोमीटर के हिस्से में कम्यूटर यातायात के मुख्य साधन हैं। ये इक्के सवारी और सामान दोनों को लादने में काम आते हैं। इसके अलावा सामान लादने वाली बैल गाड़ी भी यदा कदा दिखती है, जिसपर सड़क निर्माण की सामग्री – बालू, सरिया या ईंट आदि लदे रहते हैं।

जब शहर में पशु पर निर्भर यातायात वाहन कम हो रहे हैं, सुलेम सराय और झलवा के बीच में उनकी दर्ज उपस्थिति अच्छी लगती है।

पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी की बड़ी चर्चा है। वैसे भी हर रोज प्रति बैरल पेट्रोलियम के दाम बढ़ते जा रहे हैं। अभी $१३२ प्रति बैरल हुआ है, पर इसी साल में वह $२०० प्रति बैरल तक जा सकता है। उस दशा में इन जीवों पर आर्धारित यातायात व्यवस्था व्यवसायिक रूप से तर्कसंगत बन सकती है।

ज्यादा अर्थशास्त्रीय गुणा भाग नहीं किया है मैने, पर लगता है कि शहर में मुख्य सड़कों के फीडर रास्तों पर इक्के और बैलगाड़ियों के लिये आरक्षण कर देना चाहिये। शेष मुख्य मार्गों पर रैपिड ट्रांजिट की प्रति वर्ग मीटर ज्यादा सवारियां ले जाने वाले वाहन चलाने चाहियें जिनपर प्रति व्यक्ति डीजल-पेट्रोल खर्च कम आये।

ऐसे में बोधिसत्व की पोस्ट का दर्द भी एक भाग में एड्रेस हो सकेगा जिसमें उन्होने कहा है कि लोग बछड़े और बेटियां मार डालते हैं। बेटियां नहीं तो कुछ बछड़े बचेंगे।

@ – स्क्रबर का डिजाइन मुझे नहीं मालुम। पर इतना पता है कि टेम्पो जैसे वाहन अपने उत्सर्जन (एग्झास्ट) में ढेर सारा अध जला हाइड्रो-कार्बन, कार्बन मोनोआक्साइड और नोक्सेज (NO, NO2, N2O) उत्सर्जित करते हैं। अगर इन वाहनों के उत्सर्जन स्थल पर स्क्रबर लगा दिया जाये तो वह इन प्रदूषक तत्वों को रोक लेता है। कहा जाता है कि इलाहाबाद में विक्रम टेम्पो इस स्क्रबर से युक्त हैं। पर उनकी कार्य क्षमता की कोई जांच होती है? जानकार लोग ही बता सकते हैं।