गंगा किनारे एक शाम


Ganga 3सूर्यास्त के समय गंगा का दांया तट, इलाहाबाद

मां गंगा मेरे घर से ५००-७०० कदम पर हैं। आज गंगा किनारे गया शाम को। गंगा में पानी बहुत बढ़ा नहीं है, पर शुरुआत की बारिश से बहाव तेज हो गया है। कोटेश्वर महादेव (वह स्थान जहां राम जी ने वन जाते समय गंगा पार कर शिव पूजा की थी) के पास कटान दांयी ओर ले रही हैं गंगा मैया।

शाम के समय तट पर बीस-पच्चीस लोग गंगा आरती कर रहे थे – दीपक, घण्ट, फूल-माला आदि से लैस। बच्चे, महिलायें और पुरुष; सब थे। बहुत अच्छा लग रहा था श्रद्धा का वह प्रवाह। मैने कुछ चित्र लिये अपने मोबाइल से। इसी बीच गंगाजी के तेज बहाव को क्षिप्र गति से चीरता एक सर्प तट पर आ लगा, पर इतने लोग और आरती की ध्वनि सुन कर कहीं दुबक गया।

Ganga 1
श्री गंगा जी
हरनि पाप त्रिबिध ताप, सुमिरत सुरसरित,
बिलसति महि कल्प-बेलि, मुद मनोरथ फरित।।१॥
सोहत ससि-धवल धार, सुधा-सलित-भरित,
बिमलतर तरंग लसत, रघुबर के चरित॥२॥
तो बिनु जगदम्ब गंग, कलियुग का करति?
घोर भव अपार सिन्धु, तुलसी किमि तरित॥३॥

दूर कुछ कुत्ते तट पर चहरक-महरक करते घूम रहे थे। कुछ नौजवान जवान लड़कियों को घूरने के ध्येय से वहां बैठे थे और बीच बीच में गंगा में दूर तक कंकर फैंकने की स्पर्धा कर ले रहे थे।
कोटेशर महादेव के पास ढ़ेरों शिवजी की पिण्डियां हैं। उनमें से एक के सामने चबूतरे पर एक काले रंग का सांड़ विराजमान था – मानो आदिकाल से नन्दी वहीं बैठे हों।

आप मेरे मोबाइलीय चित्र देखें गंगा तट के –
Ganga 6 Ganga 4
Ganga 7 Ganga 5

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Author: Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://halchal.blog/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyan1955

26 thoughts on “गंगा किनारे एक शाम”

  1. ज्ञान जी, अपने देश की इस तस्वीर को दिखा कर आपने हमे मन्त्र मुग्ध कर दिया..दूर विदेश में रह कर इस झलक की कीमत हम ही जान सकते हैं…. मन ही मन सोचते हैं कि अब तो अपने देश के हर कोने में अपने मित्र हैं… जल्दी ही सब ज़िमेदारियों से मुक्त होकर भारत भ्रमण को निकल जायेंगे…

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  2. चित्र अच्छे हैं। गंगा किनारे बालू है वो भी इत्ती सारी, जब हम हरिद्वार गये थे तो वहां तो न दिखी थी बालू, हमने सोचा सिर्फ़ समुद्र किनारे ही होती है। हम पांचवी पास से तेज नहीं न

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  3. अहा! सुंदर दृश्य. बढ़िया पोस्ट. अफ़सोस कि कभी इलाहाबाद जाना नहीं हो पाया. गंगा मैया के दर्शन बनारस में किए थे जब एयर फोर्स एस एस बी से रिजेक्ट होने गए थे दस साल पहले.

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