ब्लॉगिंग की पिरिक (Pyrrhic) सफलता


Pyrrhus
एपायरस के पिरस – विकीपेडिया में

संसद में सरकार की जीत को कई लोगों ने पिरिक जीत बताया है। अर्थात सरकार जीती तो है, पर हारी बराबर!

मानसिक कण्डीशनिंग यह हो गयी है कि सब कुछ ब्लॉगिंग से जोड़ कर देखने लगा हूं। और यह शब्द सुन/पढ़ कर कपाट फटाक से खुलते हैं:

मेरा ब्लॉगिंग का सेंस ऑफ अचीवमेण्ट पिरिक है।

पिरस (Pyrrhus) एपायरस का सेनाप्रमुख था। रोम का ताकतवर प्रतिद्वन्दी! वह रोमन सेना के खिलाफ जीता और एक से अधिक बार जीता। पर शायद इतिहास लिखना रोमनों के हाथ में रहा हो। उन्होंने अपने विरोधी पिरस की जीत को पिरिक (अर्थात बहुत मंहगी और अंतत आत्म-विनाशक – costly to the point of negating or outweighing expected benefits) जीत बताया। इतिहास में यह लिखा है कि पिरस ने एक जीत के बाद स्वयम कहा था – “एक और ऐसी जीत, और हम मानों हार गये!पिरिक जीत

मैं इतिहास का छात्र नहीं रहा हूं, पर पिरस के विषय में बहुत जानने की इच्छा है। एपायरस ग्रीस और अल्बानिया के बीच का इलाका है। और पिरस जी ३१८-२७२ बी.सी. के व्यक्ति हैं। पर लगता है एपायरस और पिरस समय-काल में बहुत व्यापक हैं। और हम सब लोगों में जो पिरस है, वह एक जुझारू इन्सान तो है, पर येन केन प्रकरेण सफलता के लिये लगातार घिसे जा रहा है।

मिड-लाइफ विश्लेषण में जो चीज बड़ी ठोस तरीके से उभर कर सामने आती है – वह है कि हमारी उपलब्धियां बहुत हद तक पिरिक हैं! ब्लॉगिंग में पिछले डेढ़ साल से जो रामधुन बजा रहे हैं; वह तो और भी पिरिक लगती है। एक भी विपरीत टिप्पणी आ जाये तो यह अहसास बहुत जोर से उभरता है! मॉडरेशन ऑन कर अपना इलाका सीक्योर करने का इन्तजाम करते हैं। पर उससे भला कुछ सीक्योर होता है?! अपने को शरीफत्व की प्रतिमूर्ति साबित करते हुये भी कबीराना अन्दाज में ठोक कर कुछ कह गुजरना – यह तो हो ही नहीं पाया।

आपकी ब्लॉगिंग सफलता रीयल है या पिरिक?!

मैं तो लिखते हुये पिरस को नहीं भूल पा रहा हूं!


Advertisements

Author: Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://halchal.blog/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt

26 thoughts on “ब्लॉगिंग की पिरिक (Pyrrhic) सफलता”

  1. ज्ञानजी, मानना पड़ेगा कि आपकी मानसिक हलचल इस ब्लॉग़जगत की धारा में भी हलचल पैदा कर देता है और बहुत कुछ नया सोचने को बाध्य कर देता है…

    Like

  2. jo cheez hame kasht deti hai usse ham sabse pahle mukti pate hain. lekin blogging ham lagaatar kiye ja rahe hain iska matlab to ye hua ki ye hame aanad de rahi hai. fir ise pyrrhic success kyo mana jaye real kyo nahi?

    Like

  3. “हमारी उपलब्धियां बहुत हद तक पिरिक हैं! ब्लॉगिंग में पिछले डेढ़ साल से जो रामधुन बजा रहे हैं; वह तो और भी पिरिक लगती है। “introspection karna achchi aadat hai

    Like

  4. Pyrrich – A Victory that also was obtained after paying a heavy price in other forms. The Bhartiya example of this in a battle field in my opinion is the Classic example of ASHOK – The heavy & senseless loss of Kalinga Sena was enough to change the heart & mind of ASHOK & bring about a mellower & gentler King ,transformed into a Benevolent & kind Monarch. Such a transformation into a higher SELF is what is desired as per the Indian Value System of Soul transformation & merit Punya. As I'm away from my PC , this comment is in English. Regards,_ Lavanya

    Like

आपकी टिप्पणी के लिये खांचा:

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s