μ – पोस्ट!


अमित माइक्रो ब्लॉगिंग की बात करते हैं।

यह रही मेरी माइक्रो  ( Style Definitions */ p.MsoNormal, li.MsoNormal, div.MsoNormal {mso-style-parent:””; margin:0cm; margin-bottom:.0001pt; mso-pagination:widow-orphan; font-size:12.0pt; font-family:”Times New Roman”; mso-fareast-font-family:”Times New Roman”; mso-bidi-font-family:”Times New Roman”; mso-bidi-language:AR-SA;}@page Section1 {size:612.0pt 792.0pt; margin:72.0pt 90.0pt 72.0pt 90.0pt; mso-header-margin:36.0pt; mso-footer-margin:36.0pt; mso-paper-source:0;}div.Section1 {page:Section1;}–> μ) पोस्ट :
दिनकर जी की रश्मिरथी में कर्ण कृष्ण से पाला बदलने का अनुरोध नहीं मानता, पर अन्त में यह अनुरोध भी करता है कि उसके “जन्म का रहस्य युधिष्ठिर को न बता दिया जाये। अन्यथा युधिष्ठिर पाण्डवों का जीता राज्य मेरे कदमों में रख देंगे और मैं उसे दुर्योधन को दिये बिना न मानूंगा।”

कर्ण जटिल है, पर उसकी भावनायें किसकी तरफ हैं?


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39 thoughts on “μ – पोस्ट!

  1. कर्ण’स dilemma or Paradox !महाभारत के कुछ किरदारों में तुलना करना बड़ा कठिन होता है… कौन श्रेष्ठ? भीष्म, विदुर, कर्ण, युद्धिष्ठिर, अर्जुन … मेरे मन में तो उत्तरोत्तर घटते क्रम में ही है… पर कई बार dilemma की स्थिति होती है… कृष्ण को इनसे ऊपर ही रखता हूँ… ये तो मेरी मनःस्थिति है… बाकी आप बेहतर समझा सकते हैं.

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  2. @सतीश सक्सेना जीप्यार के लिए तरसता कर्ण एक बहुत बदकिस्मत इंसान रहाकर्ण ने कभॊ नहीं कहा कि वह प्यार को तरसा हुआ है, प्यार उसको अपने दत्तक माता-पिता से खूब मिला और वह उन्हीं को अपना माता-पिता मानता था क्योंकि उन्होंने ही उसको जीवन दिया(नदि में बहता रहता तो कैसे जीवित रहता) और पाल पोस के बड़ा किया।कर्ण अपनी पहचान पाने के लिए तरसता था, क्योंकि जब उसे पता चला कि वह सूत पुत्र नहीं है तो उसे इस उत्कुंठा ने घेर लिया कि आखिर वह किस कुल का है, उसकी पहचान क्या है। इसी पहचान को पाने के लिए वह इस तरसता रहा।@संजय भाईसूतपुत्र को जिसने सम्मान दिया उसके प्रति अनुराग गलत कहाँ है, धर्मराज के गुणी भाई तो अछूत का अपमान करते थे…वास्तविकता से अनजान रहे हो भले.रामायण और महाभारत उस काल के भारतीय के समाज और उसमें रहने वालों के आचार-व्यवहार और मानसिकता के प्रतिबिंब है। एक संपूर्ण फिल्म की ही भांति इनमें भी आम जीवन, राजसी ठाठबाट, एक्शन, ट्रैजिडी, रोमान्स, आदि सब का समावेश है। यदि सिर्फ़ अच्छा-२ ही लिख दिया जाता तो फिर तो ये कभी सत्यता के निकट नहीं लगते और कदाचित्‌ इतनी लोकप्रिय भी नहीं होते। 🙂

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  3. बुजुर्गो ने सही कहा हे किसी का एहसान नही लेना चाहिये,वरना एक छोटा सा एहसान कई बार पेरो की बेडियां बन जाता हे, जेसे कर्ण के साथ हुआ ( मै एहसान फ़रोसो की बात नही कर रहा)ओर यह सब काथाये हमे रास्ता दिखाने के लिये ही हे , यानि हमारा मार्ग दर्शनधन्यवाद

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  4. अनीता कुमार जी की ई-मेल से प्राप्त टिप्पणी:”माइक्रो ब्लोगिंग की पहल के लिए बधाई, कर्ण की बात तो बाद में कर लेगें इस समय तो आप ये बताये कि ये माइक्रो का चिन्ह कैसे टाइप कर लिए”——–माइक्रो का चिन्ह MS Word की फाइल में प्रिण्ट कर उसे यहां कट – पेस्ट कर दिया है!

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  5. देर से टिप्पणी करने के लिए क्षमा चाह्ता हूँ।दो दिन के लिए पत्नि के साथ वेल्लोर के पास श्रीपुरम का मन्दिर गया था।अभी अभी लौटा हूँ।महाभारत मेरा सबसे प्रिय ग्रन्थ है।कई बार पढ़ चुका हूँ। एक प्रश्न जो मन में बार बार आता है वह यह है कि क्या भारत के आज के कानून के अनुसार हस्तिनापुर पर पाण्डवों का अधिकार है या नहीं। उच्चतम न्यायालय का आज क्या निर्णय होता? मैं नैतिक अधिकार कि बात नहीं कर रहा हूँ। दिनेशरायजी क्या सोचते हैं?

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  6. सचमुच microbloging…..बधाई हो !! कर्ण के लिए “मृत्युंजय” में शिवाजी सावंत ने भी अतिरेक में लिखा है..वह भी गौरतलब है और यह भी. मैं अमित जी से सहमत हूँ, महाभारत में पात्रों को उनके समस्त मानव जनित गुणों ( गुन-अवगुण ) सहित प्रस्तुत किए जाने पर ही उसकी मान्यता और चर्चा चिरकाल तक हो रही है.

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  7. वाह जी क्या बात है आपके माइक्रो की । लेख से लंबी चौडी टिप्पणियाँ । वैसे कर्ण तो दान वीर थे दान लेना कैसे स्वीकार करते । और जो उनहोने स्वयं पराक्रम से न जीता हो वह किसी और को देने में भी उन्हें संकोच ही होता ।

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  8. वैसे बिना कट-पेस्ट किये, कहीं भी µ लिखा जा सकता है।Alt दबाये रखिये, न्यूमेरिक की-पैड में 230 टाईप कीजिये, Alt छोड़ दीजिये। आया न µ !

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  9. µ बोले तो हमारे लोगों के लिये कैमिकल पोटेन्शियल ।Pressure difference results in Mechanical Movement. Temperature difference results in heat Transfer. Similarly Chemical potential difference results in Mass transfer.Irony is that the Chemical Potential itself is not as intuitive as Pressure or Temperature.हमने अपनी आंखो से कैमिकल इंजीनियर्स को कैमिकल पोटेंशियल के नाम पर पसीने आते देखे हैं 🙂 बहुत से कैमिकल इंजीनियर्स की दुखती रग है ये :)बाकी कर्ण की भावनायें मेरी समझ में तो पूरी तरह दुर्योधन के साथ थी ।

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