नहीं बेचनी।



pebbles_and_flowers“इनकी रचना को नए ब्लॉग पर डाल दो . दो धेले में नहीं बिकेगी . आज ज्ञानदत्त नाम बिक रहा है”

मुझे दो धेले में पोस्ट नहीं बेचनी। नाम भी नहीं बेचना अपना। और कौन कहता है कि पोस्ट/नाम बेचने बैठें हैं? 


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Author: Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://halchal.blog/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyan1955

36 thoughts on “नहीं बेचनी।”

  1. अरे का हजूर, अईसे कौनो भी मुंह उठा के कह देगा फेर आप उसपे सोचने गुनने बईठ जाओगे तो कैसे चलेगा जी।

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  2. कभी कभी मज़ाक में कही हुई बात भी चोट कर जाती है। आशा है आप चूक से कही बात का बुरा नहीं मानेगे और लिखते रहेंगे- बेचेंगे या बचेंगे नही। लेखनी बेचने या बचने की चीज़ तो है नहीं-क्रियेटिविटी है।

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  3. पिछली पोस्ट से सम्बंधित प्रतिक्रियाएं पढी थी, अधिक समझ नही आयी थी मगर आज आपकी प्रतिक्रिया वाली पोस्ट से मैं पूर्णतया सहमत हूँ, -लेखन वही है जो बेचने के लिए न लिखा जाए -लेखन वही है जो लोगों को प्यार और पारस्परिक सम्मान करना सिखाये -और लेखन वही जिससे आम जन मानस प्रभावित हो -ज्ञानदत्त का नाम अगर बिक रहा है, तो उस लेखन के कारण ही जो उन्होंने लिखा है ! आपकी बारे में व्यक्तिगत तौर पर परिचित न होते हुए भी जितना मैंने आपको पढ़ा है, निष्पक्षता के साथ साथ लेखन से न्याय करते रहे हैं, साथ साथ अनूप शुक्ल, ताऊ और शिव कुमार मिश्रा की अक्सर छेड़खानी युक्त प्रतिक्रियाएं पढ़ कर आपके ब्लाग पर घर जैसा माहौल लगता है ! आप जैसे लेखन की हिन्दी ब्लाग जगत को बहुत आवश्यकता है !मुझे लगता है विवेक सिंह ने शुरूआती प्रतिक्रिया शायद मजाक में लिखी हो जिसे बाद में अन्य प्रतिक्रियाओं ने गंभीर बना दिया ( बात का बतंगड़ ) . आशा है विवेक सिंह ख़ुद अपना मंतव्य स्पष्ट करेंगे !

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  4. चलिए ऐसा करते हैं की उतार कर मन से सोच की गठरियाँ कुछ हल्का लिख/कह देते हैं , मान लेते हैं कि ऐसा तो होता ही रहता है .

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  5. Kyun naraz hote hain bhaisahab, aaz kal remix ka zaamana hai. Buffet me ek hi thali me gulabzamun aur matar paneer ke sath faile huye rayate ka maza lijiye.People with weak stomach dont like your dish and tend to suffer more frequent bowel movement. Aise log NIPATNE lagate hain.

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