चाय की दुकान पर ब्लॉग-विमर्श


Mike इलाहाबाद में ब्लॉगिंग पर गोष्ठी हुई। युवा लोगों द्वारा बड़ा ही प्रोफेशनली मैनेज्ड कार्यक्रम। गड़बड़ सिर्फ हम नॉट सो यंग लोगों ने अपने माइक-मोह से की। माइक मोह बहुत गलत टाइप का मोह है। माइक आपको अचानक सर्वज्ञ होने का सम्मोहन करता है। आपको अच्छे भले आदमी को कचरा करवाना है तो उसे एक माइक थमा दें। वह गरीब तो डिरेलमेण्ट के लिये तैयार बैठा है। जो कुछ उसके मन में पका, अधपका ज्ञान है – सब ठेल देगा। ज्यादा वाह वाह कर दी तो एक आध गजल – गीत – भजन भी सुना जायेगा।  

Mikeaastraमाइक-आक्रमण से त्रस्त युवा और अन्य

ब्लॉगिंग को उत्सुक बहुत युवा दिखे। यह दुखद है कि वे मेरे ठस दिमाग का मोनोलॉग झेलते रहे। यह मोनोलॉग न हो, इसके लिये लगता है कि हफ्ते में एक दिन उनमें से ५-७ उत्सुक लोग किसी चाय की दुकान पर इकठ्ठा हों। वहां हम सारी अफसरी छोड़-छाड़, प्रेम से बात कर पायें उनसे। ऑफकोर्स कट चाय और एक समोसे का खर्चा उन्हें करना होगा।


Advertisements

34 Replies to “चाय की दुकान पर ब्लॉग-विमर्श”

  1. “ऑफकोर्स कट चाय और एक समोसे का खर्चा उन्हें करना होगा। ” हां भई, गुरुदक्षिणा तो देना ही पडे़गा ना 🙂

    Like

  2. आपने कहाँ तो बिलकुल सही मगर एक बात कहना चाहूँगा की जब जब ब्लॉग्गिंग पर कहाँ जा रहा था तब तब तो हमें कोई दिक्कत नहीं हुई थी मगर कुछ मिनट ऐसे भी रहे जब ब्लॉग्गिंग को छोड़ कर पता नहीं क्या क्या कहाँ गया तब तो ऐसी ऊब लगी की क्या कहें आपने जो स्लाइड आगे सरका दिए उनका मलाल हुआ और ज्यादा क्या कहे बाकी तो सफल आयोजन था जैसा की ब्लॉग्गिंग में भी होता रहा है सुनने वाले कम मिले (शायद मुझे ऐसा लगता है)मुझे तो बिलकुल भी नहीं लगा की किसी ब्लॉगर द्वारा माइक का अनुचित फायदा उठाया गया आपसे शिकायत है की आपने जल्दी जल्दी में निपटा दिया इमरान ने भी अच्छा सञ्चालन किया जब ब्लॉग्गिंग का परिचय दिया गया तब ये जरूरी था की ब्लॉग बनाने की प्रक्रिया की भी स्लाइड बना कर दिखाई जाये जिसकी कमी खली मुख्य अतिथी जी ने जब ब्लोगिंग पर बोलना शुरू किया वो पल यादगार है क्योकि मैंने तो कल्पना नहीं की थी की वो भी एक ब्लॉगर हैं ऐसा आयोजन बार बार हो इस कामना के साथ आपका वीनस केसरीऔर हाँ अगर आप से मुलाकात का सौभाग्य फिर मिलने का मौका मिले तो उसके लिए कट चाय तो क्या जो आप कहे सब हाजिर करने के लिए तैयार है हम

    Like

  3. @ Tiwarijiinternet par hindi anuprayog vishay par jab bhi kisi shrotavarg ke samne baat hogi to vahi baat hogi, aisa nahin hai ki aadhe anuprayog ek seminar mein bataye jayein va shesh aadhe doosre kisi karyakram mein.keval ek maien hi nahin koi bhi vakta yadi hindi anuprayog ki vartmaan sthiti par baat karega, to ye sab baat hi aayengi.ab aap use 10 baar sunein ya 1 baar. yah aap ka durbhagya tha ki aap ne ek hi din mein 2 alag alag sansthaon ke karyakram mein ek hi vakta ko suna.

    Like

  4. बढि़या रहा आयोजन…त्रिवेणी तट पर कई कई धाराओं का संगम हो गया…अब कहते हैं कि चाय की दुकान पर ही सही रहती है सब तरह की धाराएं ….यही सही। हम तो उसका लाभ भी नहीं ले पाएंगे। अलबत्ता अपने सैलून में भोपाल की तरफ घूमने निकलिएगा तो बताइएगा…।

    Like

  5. आपने लिखा यह दुखद है कि वे मेरे ठस दिमाग का मोनोलॉग झेलते रहे। लेकिन अफ़सोस कि वीनस केसरी के अलावा किसी ने इस बात का खंडन नहीं किया। कित्ती तो खराब बात है जी। सच कहने की हिम्मत बहुत कम लोगों में होती है। केवल केशरी ने सच बोला।मुझे तो कार्यक्रम बहुत मजेदार लगा। एकदम घरेलू टाइप। माइक होता ही है उपयोग के लिये। सदुपयोग करें या दुरुपयोग। आगे अगले महीने इलाहाबाद जाना है तो वहीं किसी चाय की दुकान पर हो जाये जमावड़ा। शिवकुटी में या फ़िर ट्रेजरी के पास की किसी की किसी दुकान में। कर इंतजाम भाई सिद्धार्थ जी!

    Like

  6. बाकी सभौ ठीक है लेकिन थोड़ा विस्तार से बताते कि कैसे झिलाया वहाँ मौजूद लोगों को, आप तो बस छोटी सी टिप्पणी में निपटा गए मामला! 😉 😀

    Like

आपकी टिप्पणी के लिये खांचा:

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s