तारेक और मिचेल सलाही

salahi हम ठहरे घोंघा! सेलिब्रिटी बन न पाये तो किसी सेलिब्रिटी से मिलने का मन ही नहीं होता। किसी समारोह में जाने का मन नहीं होता। कितने लोग होंगे जो फलानी चोपड़ा या  ढ़िकानी सावन्त के साथ फोटो खिंचने में खजाना नौछावर कर दें। हम को वह समझ में नहीं आता!

क्या बतायें; सेलियुग (सेलिब्रिटी-युग, कलियुग का लेटेस्ट संस्करण) आ गया है।

मिचेल सलाही ओबामा प्रसाद से हाथ मिला रही है। साथ में उसका पति है तारेक। पता नहीं कौन गदगद है – ओबामा या मिचेल।

पर नाम कमाने का यह गैटक्रैशीय तरीका हमें तो पसन्द न आया। किसी समारोह में कार्ड न मिले और कार्ड पर अपना सिरिनामा न हो तो उस समारोह में झांकने जाना क्या शोभा देता है? आप ही बताइये।


GD at Ganges2 और यह जगह है, जहां जाने को न कोई कार्ड चाहिये, न सिरिनामा। यहां मैं निर्द्वन्द गेटक्रैश करता हूं। यहां भारत के इतिहास में सबसे बड़ी सेलिब्रिटी रहती हैं – गंगाजी।

यह शिवकुटी का घाट है, जहां मेरी टीम कल रविवार को सेवा कर जा चुकी थी। मैं व्यस्त होने के कारण समय पर वहां नहीं था। बाद में देखा तो पाया कि लोगों ने घाट की सफाई और कटान का सीमेण्ट की थैलियों में रेत भर कर पुख्ता इन्तजाम किया था। इन लोगों की प्रतिबद्धता देख सुकून मिलता है।

मेरी पत्नीजी ने समय पर सीमेण्ट की खाली बोरियां और चाय-बिस्कुट भिजवा दिये थे।

गंगाजी का पानी मटमैला भी दीख रहा था और गन्दला भी! :-(  


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34 thoughts on “तारेक और मिचेल सलाही

  1. यहां भारत के इतिहास में सबसे बड़ी सेलिब्रिटी रहती हैं – गंगाजी। –वाह क्या बात कही है आपने।

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  2. सेलियुग का एक उधारण मेरे पास भी है एक शोक सभा मे अमिताभ बच्चन और कई सेली थे लोग शोक मे तो नही थे लेकिन शौक मे अमिताभ से हाथ मिला रहे थे . एक मै ही था जिसने हाथ नही मिलाया .

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  3. देखिये ज्ञानजी! आपने अपने को घोंघा कहा लेकिन किसी ने माना नहीं। आपने कहा आप सेलेब्रिटी नहीं हैं लेकिन कई लोगों आपको जबरियन सेलेब्रिटी बना दिया। लोग आपकी बात ही नहीं मानते।ये भी दिन देखने थे मुझे। 🙂

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  4. सेलिब्रेटी बनने और पैसे की आवक मे Relativity काम करती है….जितना आप सेलि…उतने आपके पास पैसे….इस मामले में पी आर एजेन्सीज आढतीयों का काम करती हैं :)वैसे सेलिब्रिटी होने से एक सुख जरूर मिलता है कि लोग झाँकते हैं और एक दुख भी मिलता है कि लोग फिर से झाँकते हैं 🙂

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  5. पर नाम कमाने का यह गैटक्रैशीय तरीका हमें तो पसन्द न आया। किसी समारोह में कार्ड न मिले और कार्ड पर अपना सिरिनामा न हो तो उस समारोह में झांकने जाना क्या शोभा देता है? आप ही बताइये।शिष्टाचार की बात है जी, सिविलाइज़्ड लोग ही समझ सकते हैं। 🙂

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