नाले पर जाली

गंगा सफाई का एक सरकारी प्रयास देखने में आया। वैतरणी नाला, जो शिवकुटी-गोविन्दपुरी का जल-मल गंगा में ले जाता है, पर एक जाली लगाई गई है। यह ठोस पदार्थ, पॉलीथीन और प्लॉस्टिक आदि गंगा में जाने से रोकेगी।

अगर यह कई जगह किया गया है तो निश्चय ही काफी कचरा गंगाजी में जाने से रुकेगा। नीचे के चित्र में देखें यह जाली। जाली सरिये की उर्ध्व छड़ों से बनी है।

 

और इस चित्र में जाली वाले बन्ध की गंगा नदी से दूरी स्पष्ट होती है।

देखने में यह छोटा सा कदम लगता है। पर मेरे जैसा आदमी जो रोज गंगा में कचरा जाते देखता है, उसके लिये यह प्रसन्नता का विषय है। कोई भी बड़ा समाधान छोटे छोटे कदमों से ही निकलता है। और यह जाली लगाना तो ऐसा कदम है जो लोग स्वयं भी कर सकते हैं – बिना सरकारी मदद के!


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34 thoughts on “नाले पर जाली

  1. बचपन से देखते आयें हैं कि जल और अग्नि सफाई करने में मूलभूत कारक रहे हैं । घरों में प्रतिदिन पोंछा जल से ही लगता है । अब हम भी ऐसी ऐसी जल में बहाना चाहते जो कि घातक हैं पर्यावरण के लिये । इनको साफ करने के लिये पृथ्वी का सहारा लें । उन्हे गाड़ देने से ग्राउन्ड वाटर रिचार्ज में समस्या आयेगी लेकिन कुल हानि कम ही होगी । स्र्वोत्तम तो यह है कि इनका प्रयोग बन्द कर दें ।

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  2. काफी पहले जहां मैं रहता था, वहां पर नालीयों में मध्यम आकार के पत्थर रख कर लोग नाली में सफाई का उपाय खोजते थे। पत्थर का फिल्टर लगाने की वजह यह थी कि लोहे की जाली का फिल्टर लगाने पर नशेडी उसे कबाड में बेच देते थे। और नाली फिर वैसी की वैसी। उम्मीद है यहां वैसे नशेडी न होंगे वरना पत्थरबाजी यहां भी अपनानी पडेगी 🙂 वैसे एक किस्म के नशेडी जरूर मिलेंगे जो इन पत्थरों में भी शिलालेख ढूंढते दिखेंगे और पूछने पर कहेंगे – यह आदि काल का स्वच्छता सूचक यंत्र है। हडप्पा में इसके अवशेष मिले थे…इस यंत्र की खूबी इसी से स्पष्ट हो जाती है कि फिलहाल गंगा सफाई अभियान में जहां करोडों लगते हैं, वहां यह दो कौडी का पत्थर अब भी उसी तरह साफ सफाई करता है जैसा कि आदि काल में करता रहा है 🙂 'पेबुल ऑफ गैंजेस' नाम की शायद किताब भी छपने लगे 🙂

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  3. ज्ञानदत्त जीआप रेलवे के सबसे बड़े अफसर हैं जिनको मैं किसी भी तरह से जानता हूँ (भले ही सिर्फ ब्लॉग के ज़रिये!). रेलवे के लिए एक सुझाव है, यदि लागू हो जाए तो बहुत अच्छा रहेगा.कृपया ये पोस्ट पढ़िए और यदि आप सहमत हों तो अपने विभाग में आगे बढाइये.http://removing.blogspot.com/2010/02/use-mobile-to-save-paper-really.html

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  4. कोई भी बड़ा समाधान छोटे छोटे कदमों से ही निकलता है। और यह जाली लगाना तो ऐसा कदम है जो लोग स्वयं भी कर सकते हैं – बिना सरकारी मदद के!बहुत सही कहा।

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  5. ये सही ब्लोगींग है – एक ख़ास इलाके के बारे में पक्की जानकारी इसी तरह मिलती है पर ये विचार भी आया के, न जाने कब ठोस एवं विश्वसनीय कदम उठाये जायेंगें जब् सही अर्थों में कचरे के निकास तथा गंगा जी के जल की निर्मलता व शुध्धि के ठोस प्रयास किये जायेंगें ? आप लिखते रहीये तभी तो वास्तविकता के बारे में और लोग जान पायेंगे स स्नेह,- लावण्या

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