हें हें हें, यह हिन्दी सेवा में है!

गूगल बज़ पर ब्लॉग पोस्टें बड़ी सरलता से जा रही हैं। लोग वहीं धो-पोंछ ले रहे हैं। पर जो गूगल बज़ से प्रारम्भ होता है, वह ब्लॉग में आने का रीवर्स माइग्रेशन अगर चल निकले तो मजा आये।

मैने एक हिन्दी सेवात्मक बज़ लिखा था। जो पर्याप्त बज़ा। उसपर प्राइमरी के मास्टर जी ने पुन: बज़ाया। वह सब नीचे पुन: गेर रहा हूं ताकि सनद रहे ब्लॉग पर।

इसमें चर्चा में आया है कि अनूप सुकुल और संजीत त्रिपाठी के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का मामला भी बनता है। अब उन्हे भुगतना है, वे भुगतें! हम तो ठेल कर चले। बहुत काम बचा पड़ा है! 🙂

हां, इस पोस्ट पर टिप्पणी बन्द नहीं है। 


Gyan Dutt Pandey – Buzz – Public

समीरलाल बज़ पर गीता ठेल रहे हैं – ये न आधुनिक कृष्ण हैं न कोई ब्लॉगजगतीय महन्त पार्थ! लिंक महत्वपूर्ण है, टिप्पणी नहीं! अत: असली महन्त तो चिठ्ठाचर्चा वाले अनूप सुकुल हैं। मैं तो मात्र तुम्हारा मार्गदर्शन करता हूं –
सर्व धर्मान परित्यज्य अनूपेकं शरणम व्रज, स त्वा सर्व पापेभ्यो मोक्षयिष्यति मा शुच:!
स एव सर्व लिंकम गिवति। किंचित फिकरम् न करोसि, पार्थ!
🙂

4 people liked this – Pankaj Upadhyay, प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI, Abhay Tiwari and सिद्धार्थ sidharth जोशी joshi

Sameer Lal – एक संत और एक महन्त-कितनी साफ रेखा है इस विभाजन की. आपका आभार इस रेखा को प्रकाशवान करने का.Apr 1

Praveen Pandey – अशोच्यानन्वशोचस्त्वं की व्याख्या टिप्पणी के संदर्भ में की जाये भक्तजनों के हेतु ।Apr 1

Gyan Dutt Pandey – @ Praveen Pandey – हम तो मात्र ठेलक हैं। व्याख्या तो संत समीरलाल करेंगे! 🙂 Apr 1

Sameer Lal – हे प्रवीण पाण्डे जी: शायद निम्न तरह से देखने पर आपकी जिज्ञासा शांत हो:
संत: सृष्टि एवं जीवों के कर्ता रूप में ईश्वर की कल्पना,
महंत: अपने देश एवं काल की माया एवं प्रपंचों से परिपूर्ण अवधारणा
ठेलक: वर्तमान जीवन की निरर्थकता के बोध से प्रभावित प्रलाप Apr 1

Gyan Dutt Pandey – @Sameer Lal –
फाउल! संत माइक थमाने पर अपने को फर्स्ट ग्रेड और ठेलक को थर्ड ग्रेड अनाउंस नहीं करता! 🙂
खैर, अब छोड़ा जाये खेला! भूख लगी है, रोटी खाई जाये फिर गुड नाइट! Apr 1

Arvind k Pandey – @Gyanji
"रोटी खाई जाये फिर गुड नाइट! "
सब्जी किसकी बनी है ? ..कोहड़े की न :-))Apr 1

Sameer Lal – बताओ!! बैठे बैठीये फाउल हो गया. :)Apr 1

HIMANSHU MOHAN – @ Praveen Pandey
कोंहड़ा खाना अच्छी बात है। कोंहड़ा खाना देश के हित में है। स्वदेशी सदा प्रयोग करें। टमाटर खाना विदेशी संस्कृति को बढ़ावा देना है।
टमाटर बेचारा…
संतों ने कोंहड़े के बारे में क्या कहा है? और महन्तों ने?
नहीं तो तुलसीदास जी ने ज़रूर कुछ न कुछ कहा होगा…
प्रवीण भाई, ज़रा पता कीजिए ना, तुलसीदास जी ने क्या कहा है? अगर न कहा हो तो हम-आप ही कुछ कह दें, टमाटर भी क्या याद करेगा। और कोंहड़ा भी…Apr 1

Gyan Dutt Pandey – धन्यवाद। रोटी खा ली। कोंहड़ा नहीं था। टमाटर था।
अब संत-असंत सब का वन्दन कर गुड नाइट। Apr 1

Anurag Mishra – ज्ञानदत्त जी आज ये सुना, आप भी सुनिए, अच्छा लगेगा.
http://www.npr.org/templates/story/story.php?storyId=125441557Apr 1

Praveen Pandey – हम तो तुलसीदास के स्वान्तः सुखाय के भक्त हैं । जो स्वादसुख दे वही पेट में, कर्व का क्या करेंगे ।Apr 1

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI – सच्ची में गर संत महंत और ठेलक बजबजाते हैं …..तो कित्ता ज्ञान मिलता है ?
थोड़ा और मिल जाता तो ….?
पापी पेट ….सब समस्याओं की जड़Apr 1

Sameer Lal – मास्साब का पापी पेट…बिना लट्ठ निकलवाये नहीं भर पायेगा. :)Apr

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI – @Sameer Lal
पापी पेट 4 ज्ञान जी !Apr 1

Pankaj Upadhyay – मास्साब लट्ठ के नाम से सफ़ाई देने लगे :DApr 1

Sanjeeva Tiwari – सब संतन सीताराम ! गुड लाईApr 1

अविनाश वाचस्पति – ताऊ जी को बुलायें
वैसे एक संत हम भी हैं
संत नगर में रहते हैं11:53 pm

अनूप शुक्ला – हिन्दी बज को प्रोत्साहित करने में आपका बहुत बड़ा योगदान है। आप साधुवाद के पात्र हैं। बस इंतजार करें पात्रजी साधुता की खेप आपमें समाने ही वाली है। :)11:58 pm

Sameer Lal – @ महंत अनूप जी : @xx करके बताना पड़ता है कि आप किसे संबोधित कर रहे हैं. मैं भी यही वाली गल्ती कर चुका हूँ. कृप्या संशोधन प्रेषित करें. :)1:38 am

अनूप शुक्ला – यह जनसाधारण के लिये है !1:41 am

Sameer Lal – जय हो महंत जी की…जय हो. जनसाधारण के लिए ऐसा विकट संदेश!! जय हो महंत जी की. आप साधुवाद …अरे नहीं..महंतवाद के पात्र हैं.1:46 am

सिद्धार्थ sidharth जोशी joshi – बज की यही खूबी है कि यह टिप्‍पणी का आभास देती है और ग्रुप चैटिंग कराती है…. हा हा हा हा1:53 am

Sanjeet Tripathi – " आप हिंदी में buzz लिखते हैं। अच्छा लगता है। मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं, इस निवेदन के साथ कि नए लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें – यही हिंदी buzz जगत की सच्ची सेवा है। एक नया हिंदी buzz किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी buzz की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।"
😉
sadhuwad se lekar mahntwad tak, sarv-vyapi ya saarv-kaalik hone ki koshish
;)1:58 am

Sameer Lal – थोड़ी सी फेर बदल के बाद भी कॉपी राईट का उलंघ्न का मामला नजर आता है. आज द्विवेदी जी (ऊकील साहेब) से फोन पर बात करुँगा दो लोगों के लिए. :)3:51 am

Pankaj Upadhyay – sameer ji! hats off to you 🙂 itne mazaak ko bhi aap kitna sportingly lete hain…so sweet..
waise Azdak ki nayi post par aapki tippani dekhi 😛 unko bhi prachaar, prasaar ke liye bula liya aapne :)5:53 am

Gyan Dutt Pandey – सबसे बढ़िया संजीत का पैरोडी है – आप हिंदी में buzz लिखते हैं। अच्छा लगता है। मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं, इस निवेदन के साथ कि नए लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें – यही हिंदी buzz जगत की सच्ची सेवा है। एक नया हिंदी buzz किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी buzz की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।
असल में हिन्दी सेवा के नाम पर अपनी आकांक्षायें बढ़ाना, प्रजाजनों से बेहतर होने की भावना subtle तरीके से व्यक्त करना, चेलाई बढ़ाने का उपक्रम – यह सब ओपन सीक्रेट है। हर उत्कृष्ट ब्लॉगर इसमें ट्रैप हो सकता है। लोगों की वाहावाही ट्रैप करा ही देती है।
हिन्दी सेवा वह ओपन सोर्स नारी प्रतिमा है, जिसको मांग भर कर हर कोई स्वामी होने का दावा कर सकता है। 🙂
@ Anurag Mishra – आपका लिंक बहुत अच्छा लगा। इस प्रकार का स्तरीय पॉड्कास्ट हिन्दी में होता है? पता नहीं।5:58 am

Sameer Lal – आश्चर्य..ओपन फिर भी सीक्रेट!!6:04 am

Anurag Mishra – पाण्डेय जी ये पॉडकास्ट यहाँ के राष्ट्रीय रेडियो सेवा का है. यू एस ए की सबसे स्तरीय रेडियो सेवा. अगर आकाशवाणी की पुरानी रिकॉर्डिंग निकली जाए तो उसमें से कई इस प्रकार के स्तरीय पॉडकास्ट निकल सकेंगे.6:16 amDeleteUndo deleteReport spamNot spam

Abhay Tiwari – बड़ी दिलचस्प बातें हो रही हैं यहाँ..7:46 am

Sameer Lal – @ अभय भाई: अब आपके आने से महत्वपूर्ण भी हो गईं. :)8:04 am

Sanjeeva Tiwari – रात से सुबह, सुबह से शाम तक चलती रहे यह बजबजाहट. आमीन10:49 am


6:36 am

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI – Buzz – Public

ज्ञानदत्त उवाच:
हिन्दी सेवा वह ओपन सोर्स नारी प्रतिमा है, जिसको मांग भर कर हर कोई स्वामी होने का दावा कर सकता है। 🙂

मानसिक हलचल

1 person liked this – प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI

Gyan Dutt Pandey – बाई गॉड की कसम, हमने यह मांग नहीं भरी और यह दावा नहीं किया। आप करते हैं क्या? 6:42 am

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI – @Gyan Dutt Pandey सर जी !
हर कोई में …….हर कोई शामिल है ???7:00 am

Gyan Dutt Pandey – @ प्रवीण त्रिवेदी – हम मात्र ठेलक हैं, व्याख्या करना हमारे पर्व्यू में नहीं! किसी विद्वान से पूछो!
अच्छा चलें, अब ट्रेन हांकने के खटराग में लगें! 7:09 am

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI – @Gyan Dutt Pandey प्रभो! हमारी भी बौद्धिक औकात "ठेलक" से ज्यादा कहाँ? देखिये ना अब आपका ही …..?.
हमारा तो आज गुड (फ्राई) डे है !7:16 am

Sameer Lal – हम हर कोई में नहीं आते..विशिष्ट जो ठहरे!! इसमें अनूप शुक्ला जी आ सकते हैं बाई डेफिनिशन!! चिट्ठाचर्चा करते हैं न ऊ!!8:10 am


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19 thoughts on “हें हें हें, यह हिन्दी सेवा में है!

  1. अपुन तो थर्ड़ क्या फ़ोर्थ ग्रेड के हैं,अपने तो बाल्कनी के भी ऊपर से निकल गया सब कुछ्।

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  2. अब तो हिन्दी की सेवा होकर ही रहेगी। किसी माई के लाल में दम हो तो रोक कर देखे।कॉपीराइट का मामला तो हम निपट लेंगे लेकिन ये ज्ञानजी इस तरह के स्त्री विरोधी संवाद लिखने से कब उबरेंगे? हिन्दी सेवा वह ओपन सोर्स नारी प्रतिमा है, जिसको मांग भर कर हर कोई स्वामी होने का दावा कर सकता है। यह अच्छी बात नहीं है!

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  3. खूब बज्ज बज्जा रहे हो, इसी बहाने न जाने किस किस की बजाई जा रही है. कोनो काम धंधा नहीं है का? खैर जब महत्त्वपूर्ण लोग ही बज्जा रहे हैं तो हमरी का औकात परशन करने कि. हम भारतीय है बड़े बातुनी…जै हो…

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  4. चेलाई की मलाई तो चाटने वाले जाने..चिंदी सेवा.. मेरा मतलब है हिंदी सेवा, हम भी करना चाहते है.. बोले तो आई आल्सो वांट टु डु हिंदी सेवा.. एक किस्सा शेयर करूँगा..एक बुढिया सड़क पर खडी थी.. दो लड़के आये और बोले हम आपको सड़क पार कराते है.. बुढिया लाख चिल्लाती रही कि हम सड़क को पार करके आये है पर लड़के माने नहीं और बुढिया की सेवा करते हुए उसको सड़क पार कराकर वही पहुंचा दिए जहाँ से वो आयी थी.. लडको ने सुना था बुजुर्गो की सेवा करो.. सो कर दी..

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  5. बहुत सही बज़बज़ाहट है। हमने यह खेल अभी नहीं सीखा।शुक्ला जी ने बता ही दिया कि क्या बात सही नहीं है सो हम दोबारा नहीं कहते।घुघूती बासूती

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  6. वाह ! बढ़िया बजाया बज्ज को | यह बज्जबजाहट हमने बज्ज पर भी पढ़ी थी पर पूरी समझ अब आई है |

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  7. सारा मसाला सर के ऊपर से निकल गया हमहूँ नहीं उचके कि कही सर ना फूट जाये हिन्दी सेवा में आपका सभी का सहयोग सच में अतुलनीय है हा हा हा

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  8. माथा बज़्ज़ा गया..लेकिन ससुरी बज़्ज़ चली जा रही है!! अब वहाँ बेड टी की डिमांड आन पड़ी है.

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  9. बज्ज बज्ज बज्ज बज्ज बज्ज बज्ज बज्ज बज्ज बज्ज बज्ज….वैसे सबसे अधिक बजियाने वालों में हम भी शामिल रहते हैं मगर अफ़सोस की हमने इस पर कहीं भी कमेन्ट नहीं किया, नहीं तो आज हमारा भी नाम भी आपके पोस्ट पर टंगा होता.. 😦

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  10. जब ट्रेन किसी स्टेशन से चलना प्रारम्भ करती है तो दृश्यों में जो उठक पटक रहती है वैसी ही कुछ बज़ नामक स्टेशन में दिखायी पड़ रही है । ट्रेन कुछ देर चलेगी, टिकट चेकिंग हो जायेगी तब सब व्यवस्थित हो जायेगा ।

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  11. @ Sr. Mahesh Sinha jiइसी लिए तो वो लिव इन रिलेशन वाला फंडा आ गया है..मांग भी भर लो और जिम्मेदारी भी न लो..कोर्ट का फैसला है..हम क्या कर सकते हैं. ज्याद से ज्यादा बज़्ज़िया देंगे.

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  12. सर्व धर्मान परित्यज्य अनूपेकं शरणम व्रज, स त्वा सर्व पापेभ्यो मोक्षयिष्यति मा शुच:!स एव सर्व लिंकम गिवति। किंचित फिकरम् न करोसि, पार्थ!:-)…इस नई उक्ति से कृतार्थ हुआ.

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