नाले पर जाली – फॉलोअप

मैने इक्कीस फरवरी’२०१० को लिखा था :

Vaitarni Nala Jaali_thumb[2] गंगा सफाई का एक सरकारी प्रयास देखने में आया। वैतरणी नाला, जो शिवकुटी-गोविन्दपुरी का जल-मल गंगा में ले जाता है, पर एक जाली लगाई गई है। यह ठोस पदार्थ, पॉलीथीन और प्लॉस्टिक आदि गंगा में जाने से रोकेगी।

अगर यह कई जगह किया गया है तो निश्चय ही काफी कचरा गंगाजी में जाने से रुकेगा।

Vaitarnai nala follow up

आज देखा कि सरकार ने मात्र जाली लगा कर अपने कर्तव्य की इति कर ली थी। जाली के पास इकठ्ठा हो रहे कचरे की सफाई का अगर कोई इन्तजाम किया था, तो वह काम नहीं कर रहा। अब पानी इतना ज्यादा रुक गया है जाली के पीछे कि वह जाली से कगरियाकर निर्बाध बहने लगा है। अर्थात पॉलीथीन और अन्य ठोस पदार्थ सीधे गंगा में जा सकेंगे।

ढाक के कितने पात होते हैं? तीन पात!


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43 thoughts on “नाले पर जाली – फॉलोअप

  1. जो गंगा मिलन की आस लिए जा रहा है उसे क्या रोक सकेंगे। आस लगाने के पहले ही कोई इंतजाम हो तो कोई बात बने। हमारी तो आदत है। शिवजी का चबूतरा बना कै पुन्न कमा लिया। पीछे सब कुछ बकरियों के हवाले।

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    • ओह, वे कनाडे से आदेश का इन्तजार कर रहे हैं। आप जरा पत्र लिख दें!

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    • हां, एक कदम आगे और डेढ़ कदम पीछे चलते हैं हम!

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  2. कभी कभी सोचता हू कि एक सोफ़्टवेयर डिलीवरी मोडल की तरह सरकार को भी सपोर्ट सिस्टम प्रोवाइड करना चाहिये… जाने ऐसे न जाने कितने काम सिर्फ़ काम खत्म किये जाने की दृष्टि से किये जाते है.. डिलीवरी के बाद (नाला बन जाने के बाद भी) कम से कम कुछ साल तक तो सपोर्ट देना चाहिये.. हो सकता है प्रोसेस के बारे मे सोचते हुये जो कुछ जो छूट गया हो वो बाद मे समझ मे आ जाय…

    पता नही, ऐसी चीज़े और सैड ही करती है.. 😦

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  3. कमाल है आज भी नाला उसी जाली से होकर गुजर रहा है . हमारे यहा एक नदी पर पुल बना जब तक पुल बन कर तैयार हुआ तब तक नदी ने अपना रास्ता बदल दिया . आज भी बडा पुल रेत मे खडा है और नदी बह रही है पडोस मे

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  4. जनता जागरूक होंकर कुछ कर दे तो कर दे सरकार के बस की तो नहीं है..

    वैसे ब्लोगर और वर्डप्रेस में कंटेंट रिप्लिकेट हो रहा है.. मिरर ब्लोग्स को गूगल पेनलाईज भी कर सकता है.. सलाह यही है कि एक को बंद कर दिया जाए या फिर दोनों पर अलग पोस्ट लायी जाए..

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    • सलाह यही है कि एक को बंद कर दिया जाए या फिर दोनों पर अलग पोस्ट लायी जाए..

      सलाह के लिये धन्यवाद। आप सही कह रहे हैं। इस पर ध्यान देता हूं।

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    • पाण्डेय जी … मैंने प्रयोग के तौर पर पोस्टरस से होते हुए वर्ड प्रेस, ब्लोगर, लाइव जर्नल, टाइप पैड, फेसबुक, ट्विटर, आदि पर एक साथ पोस्ट करता हूँ… लेकिन द्विविधा में रहता हूँ कि किसे अपनाऊं किसे छोडूं … फिलहाल खेला सब पर चालू है 🙂

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      • एक मुख्य ब्लॉग-खम्भा रहे जो आपकी पहचान बताता हो। मैं तो इसी विचार पर चला हूं। पोस्ट करने में नियमिता रहे और रहे संवाद। यही ब्लॉगरी है मेरे हिसाब से।

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  5. देखिये, हम कित्ते होशियार हैं, आपकी पहले वाली पोस्ट से पता लगा लिया था कि आप गोविन्दपुरी के आस-पास की फोटो खींचे हैं. ये इलाका पिछले कुछ दिनों में तेजी से विकसित हुआ है और अब प्रदूषण फैलाने में अल्लापुर, झूंसी वगैरह की बराबरी करने लगा है. जाली लगाना तो एक उपाय हो सकता है, पर बाढ़ के समय क्या होगा? वैसे जब ये सिस्टम ऐसे ही नहीं काम कर रहा है, तो बाढ़ के दिनों की बात करना बेकार है.
    हमारे देश में कई सरकारी योजनायें इसीलिये बेमानी हो जाती हैं कि उनकी निगरानी की व्यव्स्था ठीक नहीं है. सब कुछ राम भरोसे… !

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    • देखिये, हम कित्ते होशियार हैं > हमें इस पर कोई शक ही न था! 🙂

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  6. ठहराव अधिक हो तो कगरियाकर बहना…इस विशेषता पर खयाल कर रहा हूँ !
    मजेदार बात है यह कुछ दूसरे मामलों में !

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    • ओह, अन्य कोण से सोचा न था! पर सोचना है मजेदार।

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  7. मेरे कुछ कह देने से थोड़े न सरकार व्यवस्था कर देगी 🙂
    सरकार और व्यवस्था को यहाँ गरियाने से कुछ नहीं होगा…. इसलिए हम कुछों नहीं कहेंगे. ऐसी व्यवस्था हर जगह दिख जाती है. आपने देखा यही बहुत है… झूठ क्यों बोलें हम तो इग्नोर कर देते हैं.

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    • सरकार और व्यवस्था को यहाँ गरियाने से कुछ नहीं होगा….
      बिल्कुल। असल में पहली पोस्ट और यह फॉलो-अप सरकार की प्रशंसा या गरियाने में नहीं, मात्र परिवेश की रिपोर्टिंग में है!
      सरकार में हूं और जानता हूं कि व्यवस्था में जंग कैसे लगता है! 🙂
      मोटीवेशन बहुत जटिल विषय है सरकारी क्षेत्र में।

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  8. हमने पहली पोस्ट पर भी कहा था –
    “HIMANSHU MOHAN – ठोस कचरे को रोकने का ठोस उपाय-सस्ता, टिकाऊ और आसान। सरकारी।
    ऐसी कई जालियाँ समाज को भी लगानी चाहिए, न केवल गंगा के लिए, बल्कि सांस्कृतिक प्रदूषण की रोकथाम के लिए भी।EditFeb 21”
    🙂
    तब समझते नहीं थे ठीक से न!(जैसे अब समझते हैं?) सो बज़ पर ही कमेण्ट दे दिया करते थे और सोचते थे कि पहुँच गया, जैसे जहाँ मन आए जल चढ़ा के समझते हैं शंकर जी को सीधे पहुँचा…

    सो अब देखते हैं तो लगता है कि समाज के किए बिना कुछ स्थायी नहीं हो सकता; दूसरे सांस्कृतिक प्रदूषण भी ऐसे ही जाली से बगलिया कर धँसा चला आता है; और तीसरे खुशी की बात है कि अब तक (जब तक भी हो) तो चला न जाली का प्रभाव! और जाली चोरी नहीं हुई किसी स्मैकिए द्वारा-ये कोई छोटी बात है?
    बाक़ी ढाक में तीन भी बचे रहें पात तो कुछ तो बचेगा! ढाक वहाँ भी होता है जहाँ दूर-दूर तक कुछ नहीं होता और यह एक बहुत बड़ा वानस्पतिक सहारा है जैव जगत के लिए।

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    • और जाली चोरी नहीं हुई किसी स्मैकिए द्वारा-ये कोई छोटी बात है?
      हां, यह तो गंगा माई की कृपा है!

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  9. टुटपुंजिया सरकार !
    टुटपुंजिया उपाय !!
    …………
    हवा और पानी दोनों का बहना विषाक्त और अवरोधपूर्ण हो गया है !
    अफसोसनाक है !

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    • ओह, मैं अब भी आशावान हूं। कुछ शोर मचाया गया है। नगरपालिका वाले शायद सफाई करायें नाले की जाली की। तब शायद कहानी बने कि “लोग सरकार को ठेलें, और सरकार काम करे!”
      एक दो दिन प्रतीक्षा करें आगे और फॉलो-अप की।

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  10. पोस्ट के बाद टिप्पणियों और उनके जबाब पढना हमेशा ,रोचक होता है…अंतिम उत्तर में आपने सही कहा…”सरकार को ठेलने की जरूरत है ” …ना जनता आराम से बैठे ना सरकार को बैठने दे तभी कुछ सकारात्मक कार्य संभव हैं ..वरना खानापूर्ति होती रही है और होती रहेगी..

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    • टिप्पणियां – हां!
      पर कुश ने कहा है कि यह डबल पोस्टिंग गूगल की नियमावली के विरुद्ध है। लिहाजा कल से इस वर्डप्रेस ब्लॉग पर पोस्टिंग बन्द! 🙂

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  11. hmm, aisa hai hujur ki aakhir nagriko ka bhi kuchh farj banta hai, sarkar ne ya nagar nigam ne jaali lagwa di. ab agar uske bad reguler safai nai ho rahi to us ilake ke paarshad ye nagar nigam ke adhikari ko hadkaya jaye nagriko dwara……ye soch kar baith jana ki bas jali laga diya sarkar ne ya nagar nigam ne so bas aman chain ye soch to galat hai na. jaisa ki bharat desh called india me ravayat hai ki aapko khud hi nyay ke liye darwaje khat-khatane padenge, vaise hi bar bar ward parshhad ya pata nahi aapke yaha nagar nigam ke ilake ke member ko jo bhi kahte ho use pareshan karna hi hoga……

    baaki ek baat batao saheb, je photo kitti purani ya new lagaye ho apni

    😉

    vaise apan ne apna thikana sabse pahle wordpress me hi banaya tha lekin bas 10 din me hi apna tin-tappar utha ke blogspot pe chale gaye the bat 2007 ki hai….

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    • फोटो एक दशक पुरानी है। दिव्या जी ने कहा था कि प्रसन्नमन फोटो होनी चाहिये। उसके बाद की थी नहीं! 😦

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  12. सब कुछ सरकारै करेगी! वाह जी वाह! सरकार ने नाला बनवा दिया। अब उसमें पन्नी जनता डाले और सरकार उसको साफ़ करवाये। जनता भी बेचारी क्या करे! उसके पास भी बहुत काम हैं। गंदगी करना है, सरकार को कोसना है। न जाने क्या-क्या! 🙂

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    • सरकार तो बीमार गदहिया है। हर कोई लात लगा देता है।

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  13. Gyan ji…

    This is the perfect pic. Its going well with your persona.

    The move (light purple) coloured shirt, the faint smile, the subtle twitching of cheek muscles, the cool and thoughtful looks behind the specs…

    Thanks for paying heed to my request.

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  14. शहरों के फैलते आकार के साथ साथ कचरे और दूषित जल का निकास भी बढ़ेगा … और इसकी कहीं न निकासी भी करनी ही होगी … नदियों के अलावा पानी को निस्तारित करने का और कोई विकल्प नहीं दीखता …. और इतने अधिक दूषित जल को फिल्टर कर के नदियों में छोड़ने का कार्य असंभव नहीं तो कठिन ज़रूर है … नदियों की स्थिति और भी भयावह हो जाय तो अतिशयोक्ति नहीं … निकट भविष्य में कोई जादू नहीं होने वाला … फिलहाल दूषित जल का कृषि में इस्तेमाल एक विकल्प हो सकता है … लेकिन इसके केमिकल क्या खेती के लिए उचित हैं ?

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    • आज सवेरे सफाई वाला पकड़ में आ गया। यह जाली साफ हो रही है।

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