नयी सुबह

 

सूर्योदय

हनुमान जी अपने मन्दिर में ही थे। लगता है देर रात लखनऊ से लौट आये होंगे पसीजर से। लखनऊ जरूर गये होंगे फैसला सुनने। लौटे पसीजर से ही होंगे; बस में तो कण्डक्टर बिना टिकट बैठने नहीं देता न!

सूर्जोदय हो रहा था। पहले गंगा के पानी पर धूमिल फिर क्या गजब चटक लाल। एक नये तरह का सवेरा! बड़ी देर टकटकी बांध देखते रहे हम।

जूतिया के व्रत का नहान। पर गंगाजी में इतना ज्यादा पानी आ गया है कि अच्छों अच्छों को पसीना आ जाये पानी में हिलने में। लिहाजा एक दो औरतें ही दिखीं। पण्डाजी की दुकान चमक न पा रही थी।

मैने जोर से सांस भरी – आज नई सी गन्ध है जी। नया सा सवेरा।


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24 thoughts on “नयी सुबह

  1. नई गंध है जी.तड़के ही आँख खुल गयी. लेटे-लेटे क्या करते? उठ गए. पानी भरा. कपडे धोये. नहाया. दिया लगाया.फिर ये पोस्ट पढी.दिन की बढ़िया शुरुआत.'जूतिया के व्रत का नहान'. इसपर तो पोस्ट की गुंजाइश है जी.

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  2. मलिकाइन जिउतिया व्रत हैं। आप ने इस व्रत को याद किया है तो यह लिंक दे रहा हूँ: http://girijeshrao.blogspot.com/2009/06/1_09.htmlहनुमान जी को अभी आराम करने दीजिए। उन्हें दूर तक जाना है। पैसेन्जर नहीं मेट्रो स्टेशन की ए सी गाड़ियों में धक्के खाना है। आखिर में लौट के बुद्धू घर को आए की तर्ज़ पर सरजू के पानी में लाली के साथ साथ गन्दगी भी निहारना है। जय राम जी की।

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  3. अपने आराध्य की सेवा का व्रत जो लिया है, जाना तो पड़ेगा ही निर्णय सुनने। कल ट्रेनें खाली रही हैं हर जगह, बड़े आराम से आये होंगे सोते सोते, निश्चिन्त होकर। साठ साल की प्रतीक्षा की थकान है, अभी सोने दें बजरंग बली को।

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  4. चित्र बहुत सुन्दर हैदेखकर मन शांत हुआ। अब विषय से कुछ हटकर:google dictionary का कई बार सफ़लता पूर्वक प्रयोग किया हूँgoogle translate के बारे में बहुत सुना था। आज आजमाया। बडी आशाएं नहीं थी फ़िर भी बहुत निराश हुआ।देखिए आपके इस लेख की क्या हालत कर दी google ने!शुभकामनाएंजी विश्वनाथ==============Hanuman was in his temple. Pasiezar think of late night will be returned to Lucknow. Lucknow must have definitely decided to listen. Will be returned to Pasiezar; just does not sit so Kandctor not without ticket!Surgoday was going on. Ganga water before beating then what wonderful bright red. Dawn of a new way! Gaze while watching big dam.Jutiaya Nehan of the fast. So much water has come to move Achchoan Achchoan Let the sweating. So the two women Diakiean. Pndaji store was able to not shine.I filled out loud breath – today's live new C smell. Sa new dawn.

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  5. विश्वनाथजी ने जो कुछ हिंदी से अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया उसे मैंने दोबारा हिंदी में ट्रांसलेट करके देखा. परिणाम रोचक है. पढ़ें:हनुमान मंदिर में उसके थी. Pasiezar देर रात के बारे में सोच करने के लिए लखनऊ लौटा दी जाएगी. लखनऊ ज़रूर सुनने का फैसला होगा. Pasiezar को लौटा दी जाएगी, अभी तो नहीं बैठ करता है Kandctor टिकट के बिना नहीं!Surgoday पर जा रहा था. तो क्या अद्भुत चमकदार लाल पिटाई से पहले गंगा जल. एक नया तरीका के डॉन! टकटकी जबकि बड़े बांध देख रहे हैं.तेजी से Jutiaya Nehan. पानी इतना सारा करने के लिए कदम Achchoan Achchoan पसीना चलो आ गया है. Diakiean दो महिलाओं तो. Pndaji दुकान चमक नहीं करने के लिए सक्षम था.आज जीना नई सी गंध – मैं ज़ोर से साँस भर दिया. नई सुबह सा.

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  6. `अच्छों अच्छों को पसीना आ जाये हिलने में। लिहाजा एक दो औरतें ही दिखीं'नहाना… पसीना… हसीना 🙂

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  7. It was fun reading Nishant Mishra's re translation back to Hindi.I remember an old joke.A machine was invented to translate from English to Japanese.It was proudly presented to all.A volunteer offered an English sentence to the machine to translate viz:The spirit is willing but the flesh is weak.The machine gave an output in Japanese.Since the person who supplied the English sentence did not know Japanese he fed the Japanese sentence back and asked for a translation into English.The result was:The wine is agreeable but the meat has gone bad.RegardsG VishwanathI will be sending you Part 4 of my guest posting in a day or two.

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  8. जय राम जी की। गंगा मइया की कृपा से आपकी चिट्ठाकारी यूँ ही चलती रहे।

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  9. लगता है हनुमान जी नाराज़ होकर पैसिंजर से बिना टिकट आये हैं, निराशा में टिकट कटवाना भूल गए होंगें.निराशा इस बात की कि उनके राम लला को जन्म स्थान तो मिल गया, पर उनकी अर्धांगनी कि रसोई किसी और कि हो गयी……, लव-कुश के खेलने का स्थान भी किसी और का हो गया, अब कहाँ पकाएं कहाँ खेले………सुप्रभात……चन्द्र मोहन गुप्त

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  10. शायद ऐसी ही किसी सुबह के लिये कवि दिनेश कुमार शुक्ल की किसी कविता का एक अंश है-पंखुरी-दर-पंखुरी दिन खुल रहा हैसमय की गति मंद करता हुआजैसे पक रहा हो, दाल पर फलघुमडता हो रागकोई कंठ बस अब फूटने को है.

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