हिन्दी हितैषणा वाया जर्सी गाय



हिन्दी ‘सेवा’ की बात ब्लॉगजगत में लोग करें तो आप भुनभुना सकते हैं। पर आपके सपोर्ट में कोई आता नहीं। पता नहीं, इतने सारे लोग हिन्दी की सेवा करना चाहते हैं। हिन्दी ब्लॉगजगत में सभी स्वार्थी/निस्वार्थी हिन्दी को चमकाने में रत हैं और हिन्दी है कि चमक ही नहीं रही। निश्चय ही हिन्दी सेवा पाखण्ड है। यह पाखण्ड चलता चला जा रहा है।

पर जब अज्ञेय जैसे महापण्डित ‘हिन्दी हितैषी’ की बात करते हैं तो मामला रोचक हो जाता है। आप उनका लिखा पढ़ें – Continue reading “हिन्दी हितैषणा वाया जर्सी गाय”

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