खोपड़ी की कथा

किसी ने कछार में खेत की बाड़ बनाने में एक खोपड़ी लगा दी है। आदमजात खोपड़ी। समूची। लगता है, जिसकी है, उसका विधिवत दाह संस्कार नहीं हुआ है। कपाल क्रिया नहीं हुई। कपाल पर भंजन का कोई चिन्ह नहीं।

भयभीत करती है वह। भयोत्पादान के लिए ही प्रयोग किया गया है उसका।

कछार में घूमते हुये हर दूसरे तीसरे देख लेता हूँ उसे। जस की तस टंगी है उस बल्ली पर। कई चित्र लिए हैं उसके।
आपके लिये ये दो चित्र प्रस्तुत हैं-
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20 thoughts on “खोपड़ी की कथा

  1. मनुष्य जीवन भर प्रेत पिशाचों से डरता है और मृत्यु पश्चात खुद दूसरों को डराता है अजीब विडमबना है !!!!

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  2. खोपड़ी के बैकव्यू वाले चित्र के ठीक नीचे गैलेक्सी II वाला चित्र/विज्ञापन बहुत प्रासंगिक लग रहा है, बेस्ट बाई ऑफ़र 🙂

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  3. खोपड़ी पर पीछे सिलाई टाइप तो देखा, क्या मजबूत जो़ड़ है कुदरत का।

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  4. सीलाई के लिये अमिटो धागों का उपयोग किया गया है, (पोस्टमार्डम के बाद)

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