फोड़ (हार्ड कोक) के साइकल व्यवसायी

मैं जब भी बोकारो जाता हूं तो मुझे फोड़ (खनन का कोयला जला कर उससे बने फोड़ – हार्ड कोक) को ले कर चलते साइकल वाले बहुत आकर्षित करते हैं। कोयले का अवैध खनन; उसके बाद उसे खुले में जला कर फोड़ बनाना और फोड़ को ले कर बोकारो के पास तक ले कर आना एक व्यवसायिक चेन है। मुझे यह भी बताया गया कि बोकारो में यह चेन और आगे बढ़ती है। यहां इस हार्ड कोक को खरीद कर अन्य साइकल वाले उसे ले कर बंगाल तक जाते हैं।

फोड़ के फुटकर व्यवसाय पर पुरानी पोस्ट है – फोड़ का फुटकर व्यापार

मैं बोकारो में स्टील प्लाण्ट की ओर जा रहा था। रास्ते में ये साइकल व्यवसायी दिखे तो वाहन रुकवा कर एक से मैने बात की। मेरे साथ बोकारो के यातायात निरीक्षक श्री गोस्वामी और वहां के एरिया मैनेजर श्री कुलदीप तिवारी थे। कुलदीप तो वहां हाल ही में पदस्थ हुये थे, पर गोस्वामी ड़ेढ़ दो दशक से वहां हैं। उन्हे इन लोगों को पर्याप्त देखा है।

फोड़ का व्यवसायी  और यातायात करने वाला - बालूचन्द

फोड़ का व्यवसायी और यातायात करने वाला – बालूचन्द

वे एक के पीछे एक चलने वाले दो साइकल सवार थे। मेरे अनुमान से उनमें से प्रत्येक के पास लगभग तीन क्विण्टल कोयला था। साइकल के दोनो ओर, बीच में और पीछे लादा हुआ। लगभग इतना कोयला, जिससे ज्यादा लाद कर चल पाना शायद सम्भव न हो। चित्र मैने दोनो के लिये पर बातचीत आगे चलने वाले साइकल व्यवसायी से की।

उसने बताया कि वह धनबाद क्षेत्र के जारीडिह से यह हार्ड कोक/फोड़ ले कर चले हैं। उसके पास लगभग तीन क्विण्टल कोयला है। वे आगे नया मोड़ तक जा रहे हैं बेचने के लिये। तीन क्विण्टल फोड़ उसने चार सौ रुपये में खरीदा है। इसे जब नया मोड़ पर वह बेचेगा, तब तक उसका लगभग 100 रुपया और खर्च होगा। बेचने पर उसे करीब 1200 रुपये प्राप्त होंगे। इस तरह दो दिन की मेहनत पर उसे सात सौ रुपये मिलेंगे। साढ़े तीन सौ रुपये प्रतिदिन।

मैं उसके लिये व्यवसायी शब्द का इस्तेमाल इसी लिये कर रहा हूं। वह मुझे 350 रुपये प्रतिदिन की आमदनी का अर्थशात्र बड़ी सूक्ष्मता से बता गया। फिर वह मात्र श्रम का इनपुट नहीं कर रहा था इस चेन में। वह (माल – फोड़) खरीद और बेचने का व्यवसाय करने वाला था। वह शारीरिक खतरा ले कर उत्खनन के काम में नहीं लगा था, वरन ट्रांसपोर्टेशन और उससे जुड़े पुलीसिया भ्रष्टाचार को डील कर कोयले के फुटकर व्यवसाय को एक अंजाम तक पंहुचा रहा था। मैने उसका नाम पूछा – उसने बताया – बालू चन्द।

फोड़ के फुटकर व्यवसाय पर मैं पहले भी इस ब्लॉग पर लिख चुका हूं। पर इस बार बालू चन्द से बात चीत में स्थिति मुझे और स्पष्ट हुई।

पिछली पोस्ट (15 मई 2009) में मैने यह लिखा था – 

कत्रासगढ़ के पास कोयला खदान से अवैध कोयला उठाते हैं ये लोग। सीसीएल के स्टाफ को कार्ड पर कोयला घरेलू प्रयोग के लिये मिलता है। कुछ उसका अंश होता है। इसके अलावा कुछ कोयला सिक्यूरिटी फोर्स वाले को दूसरी तरफ झांकने का शुल्क अदाकर अवैध खनन से निकाला जाता है। निकालने के बाद यह कोयला खुले में जला कर उसका धुआं करने का तत्व निकाला जाता है। उसके बाद बचने वाले “फोड़” को बेचने निकलते हैं ये लोग। निकालने/फोड़ बनाने वाले ही रातोंरात कत्रास से चास/बोकारो (३३-३४ किलोमीटर) तक साइकल पर ढो कर लाते हैं। एक साइकल के माल पर ४००-५०० रुपया कमाते होंगे ये बन्दे। उसमें से पुलीस का भी हिस्सा होता होगा।

बोकारो के रेलवे के यातायात निरिक्षक श्री गोस्वामी ने बताया कि कोयला अवैध उत्खनन करने वाले और उसे जला कर फोड़ बनाने वाले अधिकांशत: एक ही व्यक्ति होते हैं। उन्हे अपने रिस्क के लिये सवा सौ/ड़ेढ सौ रुपया प्रति क्विण्टल मिलता है। उसके बाद इसे कोयला आढ़तियों तक पंहुचाने वाले बालूचन्द जैसे दो सौ, सवा दो सौ रुपया प्रति क्विण्टल पाते हैं। बालू चन्द जैसे व्यवसायियों को स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता है? मैने यह कई लोगों से पूछा, पर मुझे कोई सम्बोधन उनके लिये नहीं बता पाया कोई। उन्हे कुछ तो कहा ही जाता होगा!

मेरी बिटिया के वाहन ड्राइवर श्री किशोर ने इस चेन के तीसरे घटक की बात बतायी। नया मोड़/ बालीडीह से कोयला ढ़ोने वाले एक और साइकल व्यवसायी यह हार्ड कोक उठाते हैं और उसे ले कर पश्चिम बंगाल जाते हैं। बोकारो से पुरुलिया (पश्चिम बंगाल) अढ़सठ किलो मीटर है। वे तीन-चार दिन में अपना सफर पूरा करते होंगे। मैं अभी इस तीसरी स्तर के व्यवसायी से मिल नहीं पाया हूं। पर धनबाद – बोकारो की आगे आने वाली ट्रिप्स में उस प्रकार के व्यक्ति से भी कभी सामना होगा, जरूर। या शायद नया-मोड़/बालीडीह पर तहकीकात करनी चाहिये उसके लिये।

जारीडीह से पुरुलिया का रास्ता - 95 किलोमीटर

जारीडीह से पुरुलिया का रास्ता – 95 किलोमीटर

हां, यह तब कर पाऊंगा, जब कि मेरे मन में जिज्ञासा बरकरार रहे और मैं इस ब्लॉग को यह सब पोस्ट करने के लिये जीवित रखे रखूं।

जरूरी यह है कि, अनुभव जो भी हों, उन्हे लिख डाला जाये!

[श्री गोस्वामी ने मुझे बताया कि लौह अयस्क को भी इसी तरह अवैध खनन और वहन करने वाले व्यवसायी होते हैं। वे निश्चय ही इतना अधिक/तीन क्विण्टल अयस्क ले कर नहीं चलते होंगे। पर वे कहां से कहां तक जाते हैं, इसके बारे में आगे कभी पता करूंगा।]

फोड़ का दूसरा व्यवसायी

फोड़ का दूसरा व्यवसायी

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4 thoughts on “फोड़ (हार्ड कोक) के साइकल व्यवसायी

  1. छत्तीसगढ़ भी कोयला संपन्न है. बिलासपुर में रहते हुए मैं ख़ुद अपने लिए कोक के बड़े लड्‌डू जैसे गोले खरीदता था. बाकायदा उनके टाल थे. एक सीमेंट की बोरी भर 20 रुपये में मिला करती थी. निश्चित ही यह अवैध ही थी. उनका कहना होता था कि रेलवे की साइडिंग से बीन लाते हैं और फिर चूरा कर लड्डू बनाते हैं. उत्खनन का भी जायका लिया है.(कोयला और लौह अयस्क दोनों का)

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  2. पुरानी वाली पोस्ट पढ़ी थी। यह भी बांच ली। अब अगली का इंतजार है।

    आपकी जिज्ञासा और ब्लॉग बना रहेगा, मुझे पक्का भरोसा है।

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  3. स्थिर चित्र कहाँ हैं? उनके बिना पोस्ट बेरंग हैं ?

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