डा. प्रकाश खेतान, न्यूरोसर्जन

मेरी अम्माजी अस्पताल में हैं। उनकी कूल्हे की हड्डी टूटने के कारण उनका ऑपरेशन हुआ है। चुंकि वे दशकों से खून पतला करने के लिये नियमित दवाई लेती रही हैं; ऑपरेशन के पहले उनकी यह दवा रोक कर उनके रक्त का प्रोथ्रोम्बाइन टाइम ऑपरेशन के लिये वांछित स्तर पर लाया गया। इसके लिये दवा लगभग एक सप्ताह रुकीं। फलस्वरूप, या ऑपरेशन के कारण हुये तनाव के कारण, अम्मा को न्यूरोलॉजिकल समस्या हो गयी और यह आवश्यक हो गया कि किसी न्यूरोसर्जन-न्यूरोफीजिशियन की सलाह ली जाये।

डा. प्रकाश खेतान। चित्र उनके ब्लॉग से लिया गया।
डा. प्रकाश खेतान। चित्र उनके ब्लॉग से लिया गया।

मेरे सहकर्मी प्रदीप ओझा और उनकी पत्नी श्रीमती लता ओझा इस मौके पर काम आये। प्रदीप इस समय भोपाल में पदस्थ हैं, पर हैं इलाहाबाद के। उनके पारिवारिक मित्र हैं इलाहाबाद के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डा. प्रकाश खेतान। प्रदीप के अनुरोध पर वे बहुत सरलता से मेरी अम्मा जी को देखने को तैयार हो गये। मुझे लगा कि मैं ऑपरेशन के कारण आई.सी.यू. के बिस्तर पर भर्ती अम्माजी को कैसे ले कर उनके पास जा सकूंगा, पर डा. खेतान ने कहा कि वे स्वयम् फाफामऊ के उस अस्पताल में आ कर देख लेंगे, जहां वे भर्ती हैं।

डा. खेतान का जब मुझे फोन मिला, तो मानो नैराश्य के गहन अन्धकार से मैं उबर गया।

डा. प्रकाश खेतान के नाम से मैने इण्टरनेट पर सर्च किया तो बहुत रोचक जानकारी मिली। एक आठ घण्टे की दुरुह न्यूरोसर्जरी कर 296 hydatid cyst (हाईडेटिड सिस्ट – ब्रेन में पेरासिटिक थक्के) निकालने के लिये गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में उनका नाम दर्ज है। यह है गिनीज रिकार्ड का पन्ना

डा. खेतान के इस ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी यहां उपलब्ध है।

कल शाम साढ़े चार बजे डा. खेतान अस्पताल पंहुचे। उनकी विजिट से अस्पताल के डाक्टर और कर्मी गौरवान्वित महसूस कर रहे थे; ऐसा मुझे लगा। मेरी अम्माजी को उन्होने बहुत ध्यान से देखा। एक दक्ष डाक्टर की तरह उन्होने उनके परीक्षण किये। हाथ पैर का मूवमेण्ट करा कर देखा। आंखों और चेहरे का गहन परीक्षण किया। उस दौरान उपलब्ध डाक्टर और मैं उन्हें आवश्यक इनपुट्स देते रहे।

अस्पताल में मेरी अम्माजी। चित्र आई.सी.यू. में ले जाने के पहले का है।
अस्पताल में मेरी अम्माजी। चित्र आई.सी.यू. में ले जाने के पहले का है।

परीक्षण के बाद उन्होने उनके ऑपरेशन और अन्य टेस्ट की जानकारी ली। मैने अम्माजी की जो मैडीकल हिस्ट्री ज्ञात थी, वह तरतीबवार लिख रखी थी। उसे और पुराने परीक्षणों के बारे में उन्हे बताया। इस दौरान वे बड़ी दक्षता से डाक्टर का पन्ना लिखते जा रहे थे। दवायें, परीक्षण की जरूरत और उपलब्ध आई.सी.यू. के डाक्टर महोदय को हिदायत वे देते गये। उसके बाद मुझे मामले के बारे में उन्होने बिना तकनीकी जार्गन के समझाया।

अपने लड़के की ब्रेन इंजरी के सन्दर्भ में अनेक न्यूरोडाक्टरों और न्यूरोसाइकॉलॉजिस्टों से मेरा सामना हो चुका है। मैं यह कहूंगा कि डा खेतान के साथ यह अनुभव बहुत री-एश्यूरिंग लगा। वे पन्द्रह किलोमीटर से अपने से आये, बहुत सरलता से इण्टरेक्ट किया और आधे-पौने घण्टे का गहन समय दिया मेरी अम्माजी के लिये। … मैं उनकी सज्जनता/सरलता/दक्षता का मुरीद हो गया।

डा. खेतान को विदा करते समय मैने उनसे हाथ मिलाते हुये कहा कि मैं पहली बार किसी गिनीज़ वर्ल्ड रिकार्ड होल्डर से मिला हूं।  बहुत सरलता-सहजता से उन्होने मेरा यह कॉम्प्लीमेण्ट स्वीकार किया!

आप किसी विश्व रिकॉर्ड होल्डर से मिले हैं?

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8 Replies to “डा. प्रकाश खेतान, न्यूरोसर्जन”

  1. gouuravaneeya
    gnaana datta pandeyjee
    namaste .aapake bate ke baareme padhakar hame khed huvaa. ammajeeki
    tabiyat theek hone keliye bhagavaan se praardhana karateehu.beteko
    aaseervaad
    gnana prasuna
    Hyaderaabad

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  2. डॉक्‍टर खेतान के बारे में जानकर अच्‍छा लगा. मैं मान कर चलता हूं कि दुनि‍या में अधि‍कांश लोग अच्‍छे हैं.

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  3. Bhaiya
    I am sorry to know about the health of Mamiji that she is so ill but there is a ray of hope to know about Dr Khaitan through your Blog . We are very faithfull that this great Dr will be able to do better to Mami & she will recover soon by Dr Khaitan’s guidance.
    May Almighty grant her to recover soon.
    Anand

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  4. I have met Dr Bisht, who holds Guinness Record for 250 words-per-minute in Shorthand. He also created his own Shorthand script for Hindi, Sanskrit, Marathi and many other Indian languages. All his daughters serve in our Parliament as stenographers.

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  5. I have met Dr Bisht, world record holder Guinness for 250 words-per-minute Shorthand. He re-invented Shorthand for English, which is much easier. He also created shorthand scripts for Hindi, Sanskrit and many other Indian languages, and honoured by Ganapati Award for his innovation.
    A simple human, great thinker too. All his daughters benefited from his knowledge and work at our Parliament as stenographers.

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