विश्वनाथ दम्पति कैलीफोर्निया में अपने नाती के साथ

गोपालकृष्ण विश्वनाथ मेरे बिट्स, पिलानी के सीनियर हैं और मेरे ब्लॉग के अतिथि ब्लॉगर। पिछली बार मैने पोस्ट लिखी थी अक्तूबर 2012 में कि वे नाना बने हैं। अभी कुछ दिन पहले उनका ई-मेल आया कि वे इस समय कैलीफोर्निया में हैं। उनकी बेटी-दामाद दिन भर अपने काम से बाहर रहते हैं और उनकी पत्नी तथा वे घर पर रह कर घर का प्रबन्धन संभालते है और अपने नाती को भी।

नाती उनके बेटी-दामाद की शादी के 11 साल बाद हुआ था। वह बहुत प्यारा लगता है विश्वनाथ जी के भेजे चित्र में। उससे खिंचे विश्वनाथ दम्पति और उनके समधी लोग बारी बारी से कैलीफोर्निया प्रवास कर घर संभालने और बेबी-सिटिंग का काम करते हैं। इस समय इस कार्य पर विश्वनाथ दम्पति हैं। अब नाती 14 महीने का हो चुका है।

विश्वनाथ जी को हम उनकी बिजली वाली रेवा कार के लिये भी जानते हैं। पर लम्बे कैलीफोर्निया प्रवास के कारण उन्होने वह भरे मन से वह कार बेच दी है। दो लाख से ऊपर में बिकी वह। वे लिखते हैं – लम्बे समय तक प्रयोग न होने से वह कार बेकार हो जाती! 😦

आप उनके नाती और विश्वनाथ दम्पति का चित्र देखें। नाती का नाम? ई-मेल में उन्होने नाम बताया है ऋषि!

विश्वनाथ दम्पति और उनका नाती ऋषि। चित्र ऋषि के पहले जन्मदिन के अवसर का है। ऋषि 14 महीने का है।

विश्वनाथ दम्पति और उनका नाती ऋषि। चित्र ऋषि के पहले जन्मदिन के अवसर का है। ऋषि 14 महीने का है।

Advertisements

7 thoughts on “विश्वनाथ दम्पति कैलीफोर्निया में अपने नाती के साथ

  1. बहुत बहुत धन्यवाद ज्ञानजी, इस सम्मान और स्नेह के लिए।

    किसी तरह समय कट जाता है यहाँ।
    घर बडा है, बढिया है, सभी सुविधाएं हैं पर अकेलापन दूर करने के लिए बस हम पति पत्नि ही हैं और साथ में नाती।
    सुबह सुबह बेटी और दामाद निकल जाते हैं और बारह घंटे हम घर में ही रहते हैं, बच्चे के साथ।
    दोपहर को, उसे कुछ देर के लिए Stroller में बिठाकर कोलोनी के अन्दर घुमाने ले जाता हूँ।
    दिन में दो बार, उसे एक एक घंटे के लिए किसी तरह सुला देते हैं और हमें कुछ राहत मिलती है।
    मौका पाकर हम अपने लैपटॉप के साथ बैठ जाते हैं और अन्तरजाल-भ्रमण में लग जाते हैं।
    हम दोनों का काफी समय घर के प्रबन्धन में निकल जाता है।
    नौकर चाकर कोई नहीं है। रसोई का काम, बर्तन माँझने का काम, कपडे धोने का काम, और घर की सफ़ाई भी हम पति पत्नि साथ साथ बाँटकर करते है।
    माना की इन कामों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे तीन टाईप के Vacuum Cleaners, Dish washer, Washing Machine, Dryer, Roomba, वगैरह फिर भी समय और मेहनत की जरूरत पडती है।
    आजकल नाती चलने लगा है और साथ साथ उसपर कडी नज़र भी रखनी पडती है। घर को baby proof कर दिया गया है। सभी electric sockets पर plug लगे हुए हैं। staircase के सामने फाटक लगा दिया गया है ताकि हमारी अनुपस्थिति में वह अकेले सीढी चढने न लग जाए। आसानी से चढ जाता है पर उतरते समय गिरने का डर रहता है और हमें उसके पास ही रहना पडता है।
    शामको ७ बजे के बाद, दंपति घर लौट जाते हैं और हम बच्चे को उनको सुपुर्द कर देते है और फिर एक बार आराम अनुभव करते हैं। हम फिर से अपने लैपटॉप के साथ बैठ जाते हैं, या टी वी पर सिनेमा देखते हैं. पत्नि फोन पर या Ipad और Skype/Facetime के जरिये, भारत में अपने सहेलियों / रिश्तेदारों से बातें करती हैं, घंटों तक, और वह भी बिना कोई खर्च का। यहाँ महीने में एक fixed charge पर, Unlimited फोन और इंटर्नेट की सुविधा है।
    गज़ब का स्पीड है, यहाँ इंटर्नेट का (20 to 24 Mbps)
    Netflix movies, पत्नि का Skype session, और मेरा अन्तरजाल भ्रमण सब एक साथ चलता है (through Wifi)
    You tube बिना buffering देख सकते हैं। इंटरनेट का सही मजा बस यहाँ हमने अनुभव किया, भारत में नहीं

    मेरी रेवा गाडी बहुत याद आती है मुझे यहाँ।
    बिना लाइसेंस के, हम यहाँ गाडी चला नहीं सकते और सारा दिन घर में ही कैद रहते हैं।
    Weekends पर बेटी/दामाद के साथ कहीं हो आते हैं।

    हम ने सोचा भी नहीं था कि हम रेवा को आसानी से बेच सकेंगे। साढे तीन लाख में खरीदी थी, ६ साल पहले और २.१ में बिकी, जिसकी हमें आशा नहीं थी। यह क्यों हुआ, कैसे हुआ, हम एक अलग पोस्ट में आपको लिखकर बताएंगे।

    कुछ ही दिनों में हम यहाँ के अनुभवों के बारे में लिखकर आपको भेजेंगे।
    यदि आप उचित समझें तो इन्हें अथिति पोस्टें समझ लीजिए।

    फ़िलहाल इतना ही। आगे और लिखेंगे। एक बार फिर से आपको और टिप्पणीकारों को मेरा धन्यवाद
    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

    Like

  2. ओह.. बेच दी वो कार आपने? 😦
    बढ़िया कार थी. उनकी कार में सवारी करने के बाद मैंने अपने पापा को वह गिफ्ट करने की भी सोची थी. मगर पापा कार ड्राइव नहीं करना चाहते हैं सो प्लान ड्राप करना पड़ा. अपनी इच्छा मैं विश्वनाथ जी को भी बतायी थी.

    Like

    • पाँच साल पहले वह दिन अब भी मुझे याद है जब तुम हमसे मिलने आए थे और मैंने तुम्हें इस गाडी में सैर कराई थी।
      आजकल कहाँ हो?
      शुभकामनाएं
      GV

      Like

      • आपके ही शहर में बस गया हूँ. वापस आईये, फिर मिलेंगे. आपके घर के खाने का स्वाद अब भी अटका हुआ है.

        Like

        • बहुत अच्छा!
          मार्च १८ २०१४ को बेंगळूरु लौट रहे हैं।
          हम दोनों की सुविधा को ध्यान में रखकर पुन: मिलने का प्रोग्राम बनाएंगे।
          कृपया सम्पर्क बनाए रखें।
          शुभकामनाएं
          GV

          Like

आपकी टिप्पणी के लिये खांचा:

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s