ताक्लामाकन का रेगिस्तान,अमेजन और पुस्तक


मैने करीब दो दशक पहले रीडर्स डाइजेस्ट में पुस्तक संक्षेप के रूप में ताक्लामाकन रेगिस्तान की पश्चिम से पूर्व का सबसे दुरुह यात्रा वृतान्त पढा था। मुझे यह भी याद नहीं रहा कि यात्री कौन था – कोई अंगरेज, और पुस्तक किसने लिखी थी। पुस्तक फर्स्ट-पर्सन में लिखी गयी थी; सो बहुत सम्भव है कि यात्री ने ही लिखी हो।

यात्रा की दुरुहता और यह जानकारी कि वह एवरेस्ट विजय या अकेले अटलाण्तिक पार करने जैसे बड़े (और भीषण) अभियान  का वर्णन था; पुस्तक मेरे मन में बनी रही। पिछले पांच-सात साल से मैं उसे पुन: पढ़ने का प्रयास करता रहा। पर मेरे घर में रीडर्स डाइजेस्ट का वह अंक मिला नहीं। शायद कबाड़ी के पास चला गया था (यद्यपि रीडर्स डाइजेस्ट कबाड़ी को दिये जाने पर मनाही थी घर में)।

मैने पुस्तक को GoodReads  या गूगल पर छानने का प्रयास किया।

charles-blackmoreयह पुस्तक निकली चार्ल्स ब्लैकमोर की – The Worst Desert on Earth – Crossing Taklamakan. पुस्तक आउट ऑफ प्रिण्ट थी। अमेजन पर तलाशा इसे। वहां यह हार्ड-बाउण्ड में रु 4000.- में थी। इतनी मंहगी किताब कैसे खरीदी जाये।

अचानक अमेजन पर नीचे एक लिंक मिला। यह पुस्तक पुरानी (पर अच्छी दशा में) 305 रुपये पर उपलब्ध थी। जैसा वे लिखते हैं,उसकी एक ही प्रति उपलब्ध थी। अमेजन प्राइम पर उसका डाक-खर्च फी था।

मैने समय नहीं गंवाया (पुरानी) प्रति ऑर्डर करने में।

जब पुस्तक मेरे पास आयी तो ताजा और कोरी किताब थी। सन 1995 का संस्करण। उस समय कीमत थी 16.99 पाउण्ड। किताब सम्भवत: अनबिकी थी। ताजा पन्नों की गन्ध। शायद बाद के किसी संस्करण की कीमत 4000रु के आसपास रही हो। बहरहाल मुझे तो 305 में मिल गयी। किताबी कीड़े के लिये इससे बड़ा सौभाग्य (लक) क्या हो सकता है भला?

13-luckमुझे अश्विन सांघी की पुस्तक 13 Steps to Bloody Good Luck की याद हो आयी। सजग रहना। अवसर पहचानना और उनमें वृद्धि करना ही तरीका है अपना लक बढ़ाने का।

वही किया था मैने। किताब याद रखना। उसको सर्च करना। अमेजन पर फाइन प्रिण्ट पढना और मौके पर ऑर्डर करना – यह सब उसी लक का हिस्सा है।

पर समझ नहीं आता कि अमेजन अपनी पुस्तकों की कीमत कैसे तय करता है। उसकी साइट पर पुस्तकों (और अन्य वस्तुओं की भी) कीमतें बड़ी डायनमिक होती हैं। कभी कभी एक दिन में कई बार बदलती हैं।  कुल मिला कर अमेजनिये बड़ा दमदार कंटिया फंसाते हैं ग्राहक के लिये। ग्राहक फंस कर भी खुश रहता है।

कुल मिला कर ऑनलाइन खरीद का तिलस्म बहुत धीरे धीरे समझ में आ रहा है। पर बड़ा थ्रिलिंग है यह!


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