भट्ठा मजदूर महिला

GDMar187393
कल भी मिली थी वह महिला।

नीले रंग की साड़ी पहने जोगिया रंग के कपड़े से बंधी परात में कुछ सिर पर लिये वह कल भी वह जा रही थी और आज भी। आज उसके साथ एक और महिला भी थी। सवेरे साइकिल चला रहा था मैं डेढ़ी पर। अपनी साइकिल रोक कर पूछा – कहां जाती हैं आप? गंगा स्नान कर लौटती हैं?

उसने जवाब दिया – “नहीं, अपने घर पर ही नहा कर चली हूं। गंगा नहाने का समय कहां। भट्ठा पर काम पर जा रही हूं।“

साथ वाली महिला ने बताया कि आदमी, बच्चे सवेरे सवेरे चले गये हैं भट्ठे पर काम करने। वे खाना बना, नहा कर निकल रही हैं।

क्या काम करते हैं?

“सगड़ी पर ईंट ढोते हैं। ऊंचे-नीचे पर सगड़ी (ठेला) चलता नहीं तो हम औरतें भी खींचती हैं या धक्का लगाती हैं।“

महिलाओं की बात से लगा कि पूरा परिवार सामुहिक रूप से ईंट ढुलाई का काम करते हैं। सवेरे जाती हैं ये महिलायें और शाम को वापस लौटती हैं। परिवार भी दिन भर वहीं काम करता है।

GDMar187403

उन दोनों महिलाओं से मैने कहा – एक चित्र ले लूं? मैने सहमति का इन्तजार नहीं किया। एक औरत ने जल्दी से अपना पल्लू मुंह पर डाल लिया और दूसरी ने मुस्कुराहट दी। उन्होने पूछा – मैं कहां रहता हूं?

बताने पर कि पास के गांव विक्रमपुर से हूं, एक ने कहा – अच्छा बाभन? मन्ना दूबे हयेन उहां।

मैने कहा – हां, मन्ना मेरा साला है। उनसे परिचय का एक राउण्ड पूरा हुआ।

सामने दायें एक भट्ठा नजर आ रहा था। उसमें काम भी चल रहा था। सगड़ी (ठेले) और ट्रेक्टर ट्रॉली काम कर रहे थे। मजदूर भी दिख रहे थे। ये महिलायें इस भट्ठे पर नहीं, कटका पड़ाव के पास के भट्ठे पर काम करने जा रही थीं।  कटका पड़ाव के भट्ठे पर पूरे परिवार को मिल कर ठेला खींच सड़क पार कराते देखा था मैने कुछ दिनों पहले। वह दृष्य याद आ गया।

GDMar187343

पूरे इलाके में लगभग हर वर्ग किलोमीटर में एक भट्ठा है। सरकार ने मिट्टी के खनन पर प्रतिबन्ध हटा लिये लगते हैं – तभी हर भट्ठे पर अच्छा उत्पादन होता नजर आ रहा है। सभी की चिमनियां धुआं उगल रही हैं। कच्ची-पकी ईंटों के प्रचुर भण्डर नजर आते हैं। उसी अनुपात में रोजगार भी मिल रहा है। ट्रेक्टर ट्रालियां ईंटे ढोती नजर आती हैं।

मजदूर महिला। प्रसन्नमन।

ईंटें बन रही हैं तो ईंट की खपत भी हो रही होगी।  निर्माण गतिविधियों में भी आसपास ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा होगा। निर्माण गतिविधि जो पहले 8-10 महीने सुस्त थी, अब तेजी पकड़ती नजर आ रही है। यहां नेशनल हाईवे और रेल – दोनों पर बहुत गहमागहमी हैं निर्माण की। उनमें ज्यादातर मजदूर बाहरी नजर आते हैं, पर आसपास बहुत निर्माण स्थानीय मजदूरों से भी हो रहा होगा!

ईंट भट्ठा अभी गंगा दशहरा तक काम करते रहेंगे बरसात के मौसम से पहले। मैं आशा करता हूं कि इन महिलाओं और उनके परिवार को भट्ठे पर और उसके बाद अन्य कामों में सतत रोजगार मिलता रहे।

घर आ कर अपनी पत्नीजी से मैं पूछता हूं – इस तरह बीच सड़क रोक कर मेरे द्वारा प्रश्न करने को किस तरह लेती होंगी वे महिलायें? कोई स्पष्ट का जवाब नहीं मिला।

आपका क्या सोचना है?


 

Advertisements

Author: Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://halchal.blog/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyan1955

4 thoughts on “भट्ठा मजदूर महिला”

  1. सहज बातचीत को सहजता से ही लेती होंगी महिलायें ! फ़ोटो बढिया खैंचे ! लिखा भी चकाचक !

    Like

  2. ग्रामीण सहज-चित्त महिलाएं हैं. आप भी उन्हेंं संभ्रांत वयोवृद्ध ग्रामीण मनई लगते हैं. थोड़ा अचरज ज़रूर होता होगा लेकिन शहरी लोगों जैसा बहुत सोचविचार नहीं करती होंगीं.

    Like

आपकी टिप्पणी के लिये खांचा:

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s