यह ब्लॉग क्यूं?



मेरा ब्लॉग – मानसिक हलचल, ब्लॉगस्पॉट पर सन 2007 से है।  वहां टिप्पणियां जीवन्त हैं। पर मुझे लगता है कि कुछ पाठक मात्र टिप्पणी नहीं, संवाद चाहते हैं। ब्लॉगस्पॉट की टिप्पणी प्रणाली में वह ठीक से हो नहीं पाता।  अत: मैने DisQus का प्रयोग किया जो पठकों को रुचा नहीं।

लिहाजा यह स्थानांतरित ब्लॉग, मेरी मानसिक हलचल, वर्डप्रेस पर प्रस्तुत है। मेरा विचार है कि यहां पाठकों से ज्यादा इण्टरेक्टिव हो सकूंगा।


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25 thoughts on “यह ब्लॉग क्यूं?

  1. इस पेज को भी एडिट कर लीजिये.. अबाउट मी सेक्शन खाली पडा है.. और हो सके तो इस टिप्प्णी को अप्रूव मत करियेगा.. सही नही लगता..
    अभी आपको इस ब्लाग को एडिट करना है.. नये नये है.. थोडा टाइम तो लगेगा..

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    • हां, कुछ समय लगेगा। निर्भर करता है कि यह चलता है या नहीं! 🙂

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      • वैसे जिस तरीके से शिफ्टिंग प्रोसेस चल रही है …..मैं बड़े ध्यान से कोशिश कर रहा हूँ समझने की !

        ज्ञान जी !
        क्या पूर्णतः ब्लॉग साज सज्जा यथा टेम्प्लेट ?CSS आदि 100 % आप स्वयं ही करते हैं ….याकि 10 -20 % किसी तकनीकी माहिर की ?

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        • कोई तकनीकी माहिर सहायता को नहीं है!

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      • यह रोचक होगा देखना कि टिप्पणियां अन्तत: कहां आती हैं! ..

        तो इसलिये ये प्रयोग किया जा रहा है.. वैसे बढिया है.. आपकी ही नाक तले लोग आपस मे मारा-मारी कर लेगे.. 😀

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        • अभी प्रयोग है। देखते हैं क्या निकलता है। यहां प्रतिटिप्पणी की सहूलियत बेहतर है। टेम्प्लेट में बदलाव ब्लॉगस्पॉट में बेहतर है।

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    • तभी मैं गूगल वाला ब्लॉग रख छोड़ रहा हूं। आशा के साथ!

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  2. आपका ब्लॉग पुराने जगह ही सही है क्यूँ की मै पेहले वहाँ होके फिर यहा पधारा हूँ। सोचता रह गया की ये उल्टी गंगा क्यूँ। अब ध्यान आया ये स्थानमहात्म्य है। नाममहात्म्य भी हो सकता है। खैर कोई बात नही आपके वि४ लिखने का ढंग सही लगा इसलिए कुछ टिप्पणी लिखना ठीक समझा।

    ब्लॉग कहाँ है इसपर कुछ नही फर्रक पडता… आपके वि४पर आधारित रहता है सब। ये रहा हमारा खयाल।

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    • पारदर्शी जी, मैं उस ब्लॉग पर ही रहना चाहता था। पर वहां पाठक से इण्टरेक्शन बहुत सीधा नहीं था टिप्पणी व्यवस्था के चलते! 😦

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      • तो उसमें आप सुधार कर सकते है। वो कैसे करना ये जानना रहा आपका कर्तव्य जो हर इन्सान को तो करना ही है।

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  3. आप अपना domain name गुगल से छुडवाकर नये जगह ले जा सकते है… “gyandutt.com” नाम गुगल के पास नही छोडना… वह कैसा करना ये भी जानना है आपको।

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  4. बंधुवर
    हम आपस में शब्‍दों की नावें चला कर बरसों से संवाद कर रहे हैं। अपना फोन नम्‍बर दीजिये। आपसे बात करने का मन है। यूं ही,बस आपका अंदाजे बयां हमें अच्‍छा लगता है।
    सूरज

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  5. बहुत सुन्दर लेख हैं.आज इन्टरनेट पर हिंदी भाषा में अच्छे लेखन की बहुत मांग है.ऐसा ही एक छोटा सा प्रयास मैंने भी किया है..जानकारी के लिए http://meaningofsuccess1.blogspot.in/ विजिट करें.आशा है आपको पसंद आएगा.

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  6. महोदय,
    विशाल मेरा बहुत पुराना मित्र है वह जब भी किसी को अनुसंशित करता है तो बात में कुछ तो खास होता ही है .
    आप का ब्लॉग पड़कर कई नई सूचनाऍ प्राप्त हुई.
    धन्यवाद
    शुभकामनाओं के साथ
    रणविजय सिंह सिसोदिया
    पुणे

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