डेढ़ी – डेढ़ किलोमीटर लम्बी गांव की सड़क


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डेढ़ी पर आती (शायद गंगा किनारे से) दो महिलायें। 

वह व्यक्ति नहीं है, गाय गोरू भी नहीं है। वह गांव की सड़क है। उसके एक ओर रेलवे लाइन है। अगर लाइन का अवरोध न होता तो वह नेशनल हाईवे-19 तक जाती। दूसरी ओर द्वारिकापुर गांव है जो गंगा नदी के तीर पर है। कुल मिला कर यह सड़क, डेढ़ी, रेलवे लाइन और गंगा नदी को जोड़ती है। कहा जाये तो रेलवे लाइन और गंगा नदी देश की धमनियां हैं। दो धमनियों को जोड़ने वाला मानव निर्मित शण्ट या बाईपास है डेढ़ी। इसके अलावा यह सड़क पूर्वांचल के दो जिलों – मिर्जापुर और भदोही की सीमा पर है। इसके पूर्वी ओर करहर है – जो मिर्जापुर जिले में है और पश्चिमी तरफ़ भगवानपुर है, भदोही जिले में।

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डेढ़ी पर गंगा-स्नान कर लौटते साइकिल सवार।

डेढ़ी कुल डेढ़ किलोमीटर लम्बी है। लम्बाई नापने के लिये मैने गूगल मैप का सहारा नहीं लिया। यह और इसके जैसी अन्य कई गंवई सड़कें जो प्रधानी के फ़ण्ड में बनती हैं, उनका गूगल मैप पर अस्तित्व नहीं है। इन्हे कैसे जोड़ा जा सकता है – मुझे नहीं मालूम। अन्यथा करीब एक दर्जन सड़कों को डिजिटल सभ्यता में खींच लाता मैं। इसकी लम्बाई मैने साइकिल के पैडल गिन कर की। गांव देहात में दूरी नापने के लिये मैं वही गिनता हूं। एक किलोमीटर में 204 पैडल के हिसाब से गिनती को दूरी में परिवर्तित करता हूं। यह बहुत खुरदरा तरीका है। मुझे साइकिल में एक स्पीडोमीटर लगवा लेना चाहिये, पर वह टलता जा रहा है।

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यह महिला सिर पर क्या लिये चली जा रही है परात में? यह आपके लिये भी कौतूहल है और मेरे लिये भी!

डेढ किलोमीटर की पतली सड़क – जिसके किनारे बहुत कम लोग रहते हैं; ज्यादा तक गंगा के डूब में आने वाला सिवान है; का भी अपना एक व्यक्तित्व हो सकता है? मुझे यह बेकार सी सड़क लगती थी। पर कुछ दिन इसपर साइकिल चलाई तो इससे मोह हो गया है। इनफ़ैचुयेशन। बुढापे का प्रेम।

अब यह मेरे लिये चुनौती है कि इस पर मैं एक दो दर्जन ब्लॉग पोस्टें लिख सकूं! ध्यान से देखता हूं तो लगता है डेढ़ किलोमीटर की इस सड़क के दोनो ओर बहुत कुछ है जो मुझे (और पढ़ने वालों को भी) रोचक लग सकता है। इसके किनारे के खेत, पेड़, घास-फूस, बस्ती और उसके बाशिन्दे, सड़क पर चलते लोग और वाहन … सब मिला कर एक रोचक केनवास है।

अपना जूम वाला ब्रिज पॉइण्ट-एण्ड-शूट कैमरे की धूल पोंछ लो और बैटरी री-चार्ज कर लो, जीडी। वह सब दर्ज करो चित्रों में जो डेढ़ी के साइकिल भ्रमण में आंखों से देखते और मन में सोचते हो। अपने विपन्न शब्द भण्डार को भी मांज लो। तुम अज्ञेय सा तो नहीं लिख सकते, पर जैसा तुम लिखते थे, वैसा तो लिख सको अपनी पोस्टों में!

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डेढ़ी के उत्तरी ओर सिवान खत्म होता है। कुछ वृक्ष हैं। यहां आधा दर्जन मोर दिखते हैं। चित्र में महिला अरहर की फसल काट कर गठ्ठर बनाती हुई।

  अगला महीना, दो महीना डेढ़ी के इर्दगिर्द रहेगा!

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