मिट्टी बेचना

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आज देखा खेत खोद कर मिट्टी बेची जा रही है। पहले सोचा की शायद ग्राम सभा की जमीन के साथ यह खेल हो रहा है, पर पता चला कि किसान अपनी जमीन के साथ कर रहा है। पड़ोस के एक … Continue reading

छोटे बिजनेस मॉडल

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ठेले पर मसाला पीसने वाला चलता है। फेरीवाले की तरह। लोग अपने मसाले पिसवाते हैं। गीली दाल पिसवा कर पीठी बनवाते हैं। परसों हमारे चीफ सेफ्टी अफसर श्री एनके अम्बिकेश ऐसे और बिजनेस मॉडल बता रहे थे। पंजाबी सरदार वाशिंग … Continue reading

फोड़ (हार्ड कोक) के साइकल व्यवसायी

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मैं जब भी बोकारो जाता हूं तो मुझे फोड़ (खनन का कोयला जला कर उससे बने फोड़ – हार्ड कोक) को ले कर चलते साइकल वाले बहुत आकर्षित करते हैं। कोयले का अवैध खनन; उसके बाद उसे खुले में जला … Continue reading

माधव सदाशिव गोलवलकर और वर्गीज़ कुरियन

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वर्गीज़ कुरियन की पुस्तक – ’आई टू हैड अ ड्रीम’ में एक प्रसंग माधव सदाशिवराव गोलवलकर ’गुरुजी” के बारे में है। ये दोनों उस समिति में थे जो सरकार ने गौ वध निषेध के बारे में सन् १९६७ में बनाई … Continue reading

अर्शिया

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अर्शिया एक “माल यातायात का पूर्ण समाधान” देने वाली कम्पनी है। इसके वेब साइट पर लिखा है कि यह सप्लाई-चेन की जटिलता को सरल बनाती है। विश्व में कहीं से भी आयात निर्यात, भारत में फ्री-ट्रेड वेयरहाउसिंग जोन, रेल यातायात … Continue reading

गुटखा – पानमसाला

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हमारे मुख्य वाणिज्य प्रबन्धक (माल यातायात) सुश्री गौरी सक्सेना के कमरे में मिले श्री योगेश्वर दत्त पाठक। श्री  पाठक उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय के वाणिज्य निरीक्षक हैं। उनके काम में पार्सल से होने वाली आय का विश्लेषण करना भी है। … Continue reading

व्हाइटफील्ड

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बेंगळुरू आने का मेरा सरकारी मकसद था व्हाइटफील्ड का मालगोदाम, वेयरहाउसिग और कण्टेनर डीपो देखना। व्हाइटफील्ड बैगळुरु का सेटेलाइट स्टेशन है। आप यशवंतपुर से बंगारपेट की ओर रेल से चलें तो स्टेशन पड़ते हैं – लोट्टगोल्लहल्ली, हेब्बल, बैय्यप्पन हल्ली, कृष्णराजपुरम,  … Continue reading

मुरारी केटरिंग

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मुरारी की दुकान है चाय-ब्रेड पकौड़ा, समोसा, मिठाई आदि की। मुहल्ले में बहुत चलती है। दुकान के ऊपर हाल ही में एक हॉल बनवा लिया है। उसमे‍ कोई गणित के सर कोचिंग क्लास चलाने लगे हैं। इसके अलावा लगन के … Continue reading

लोकपाल आ गया तो इनका क्या होगा?

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हिसार में कानग्रेस की जमानत जब्त होली है। चार सीटों के चुनाव में जीरो बटा सन्नाटा ही रहा है उसके लिये। टेलीवीजन पर जितना भी फौंकें, पुलपुली जरूर कांप रही होगी। ऐसे में शीतकालीन सत्र में मजबूत लोकपाल ले आये … Continue reading

कोयले की संस्कृति

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कोयला शुष्क है, कठोर है रुक्ष है। जब धरती बन रही थी, तब बना कोयला। उसमें न आकृति है, न संस्कृति। उसमें प्रकृति भी नहीं है – प्रकृति का मूल है वह। आकृति, प्रकृति और संस्कृति दिखे न दिखे, आजकल … Continue reading

मेरा व्यवसाय – जी. विश्वनाथ का अपडेट



यह श्री गोपालकृष्ण विश्वनाथ की अतिथि पोस्ट है:

बहुत दिनों के बाद हिन्दी ब्लॉग जगत में फिर प्रवेश कर रहा हूँ। करीब दो साल पहले आपने (अर्थात ज्ञानदत्त पाण्डेय ने) मेरी अतिथि पोस्ट छापी थीं। विषय था – “जी विश्वनाथ: मंदी का मेरे व्यवसाय पर प्रभाव“।

अब पेश है उस सन्दर्भ में एक “अपडेट”।

श्री गोपालकृष्ण विश्वनाथ - यह उनकी अतिथि पोस्ट है।

दो साल पहले अपनी कंपनी का स्वामित्व किसी और को सौंपने के बाद हम अपनी ही कम्पनी में सलाहकार बन कर काम कर रहे थे। नये स्वामी आशावादी थे और जोखिम उठाने के लिए तैयार थे। उनकी आर्थिक स्थिति भी मुझसे अच्छी थी।

पर हालत सुधरी नहीं। और बिगडने लगी। दो साल से कंपनी चलाने का खर्च ज्यादा था और कंपनी की आमदनी कम थी। हमने अमरीकी प्रोजेक्ट और ग्राहकों पर भरोसा करना बन्द कर दिया। ७ साल के बाद हम देशीय ग्राहकों की सेवा नहीं कर रहे थे। कारण साफ़ था। वही काम के लिए हमें देशी ग्राहकों से आमदनी एक तिहाई या कभी कभी एक चौथाई ही मिलता था। Continue reading

डेमॉर्की के निहितार्थ



karchhanaजनवरी में बीस दिन जी-ग्रुप के लोग बिछे रहे रेल पटरी पर। एक तरफ रेल परिचालन पर कोहरे की मार और दूसरी तरफ दिल्ली-बम्बई का ट्रंक रूट अवरुद्ध किये जी-ग्रुप के लोग। लोगों को असुविधा के साथ साथ अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव। अब एक हफ्ते से ज्यादा समय हो गया, माल यातायात वहन का पीक समय है, और जे-ग्रुप के लोग उत्तर-प्रदेश/हरियाणा/राजस्थान के कई रेल खण्डों पर पसरे पड़े हैं। अपनी जातिगत मांगों को ले कर। सवारी गाड़ियां अपने रास्ते से घूम कर चल रही हैं। बिजली घरों में कोयला नहीं पंहुच पा रहा, या पंहुच भी रहा है तो 200-300 किलोमीटर अधिक दूरी तय करने के बाद।

जी-ग्रुप और जे-ग्रुप। मैं जानबूझ कर उनके नाम नहीं ले रहा। इसी तरह के अन्य ग्रुप हैं देश में। कुछ दिन पहले यहां करछना पर किसान पसर गये थे पटरी पर। Continue reading