रिटायर्ड जिन्दगी की सुबह

रिटायर्ड जिन्दगी की एड-हॉक सुबह कैसी होती है। दूध के गिलास से शुरू होती चाय जैसी।


जल्दी उठ गया हूं। जल्दी माने 4 बजे नहीं, ढ़ाई बजे। पास के बिस्तर पर पिताजी आधी रजाई नीचे गिरा चुके हैं बिस्तर से। आधी रजाई में उस मुद्रा में सो रहे हैं जिसमें मेरी दादी की कोख में रहे होंगे। मैं उनकी लापरवाही (या उनके बुढ़ापे) पर दांत पीसता हूं और उनकी रजाई उन्हें उढ़ाता हूं।

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